Raebareli News: BSA कार्यालय में निजी कारों को किराये पर लगाने का आरोप, DM से शिकायत के बाद उच्चस्तरीय जांच की मांग

Raebareli के BSA कार्यालय में निजी वाहनों को किराये पर लगाकर सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। DM से शिकायत के बाद उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

Raebareli: बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय में वाहनों के किराये को लेकर कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने बीएसए राहुल सिंह एवं कार्यालय के सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी (एएओ) पर नियमों की अनदेखी कर निजी (व्हाइट नंबर प्लेट) लग्जरी कारों को किराये पर लगाकर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। मामले की शिकायत जिलाधिकारी से करते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।

शिकायत में लगाए गए कई गंभीर आरोप

शिकायत के अनुसार, विभाग में टैक्सी परमिट वाले व्यावसायिक वाहनों के स्थान पर निजी कारों को कथित रूप से 30 हजार से 36 हजार रुपये प्रतिमाह के किराये पर लगाया गया है। आरोप है कि इन वाहनों के रखरखाव, ईंधन एवं अन्य खर्चों का भुगतान भी सरकारी मद से किया जा रहा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इनमें से कई वाहन विभागीय अधिकारियों से जुड़े लोगों के हैं और यह पूरा कार्य कथित सांठगांठ के तहत लंबे समय से संचालित हो रहा है।

वाहनों के चयन प्रक्रिया पर भी उठे प्रश्न

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि वाहन चयन से संबंधित समिति की अध्यक्षता जिलाधिकारी के स्तर पर होती है, बावजूद इसके कथित अनियमितताओं पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि जिलाधिकारी से व्यक्तिगत रूप से शिकायत करने के बाद भी यदि उचित कार्रवाई नहीं होती है तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की जाएगी।

मोटर वाहन नियमों का भी दिया गया हवाला

शिकायत में यह भी कहा गया है कि मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार निजी (व्हाइट नंबर प्लेट) वाहनों का व्यावसायिक उपयोग नियमों के विरुद्ध है। ऐसे मामलों में बिना कमर्शियल परमिट वाहन चलाने पर वाहन जब्ती, जुर्माना, पंजीकरण निलंबन अथवा निरस्तीकरण जैसी कार्रवाई का प्रावधान है। इसके बावजूद विभाग में निजी वाहनों के उपयोग का आरोप लगाया गया है।

अधिकारियों का पक्ष आना बाकी

फिलहाल इस मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी अथवा संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है। शिकायत की सत्यता और आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकेगी।

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