रायबरेली (Raebareli) जिले के भदोखर थाना क्षेत्र के राही ब्लॉक अंतर्गत लोधवारी ग्राम के चकपालों में कथित अवैध मिट्टी खनन को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन ढलने के बाद इलाके का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। रात होते ही जेसीबी मशीनें, डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सक्रिय हो जाती हैं और देर रात तक मिट्टी की खुदाई व ढुलाई का सिलसिला चलता रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह गतिविधियां लंबे समय से जारी हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।
सरकारी कार्य का हवाला, लेकिन मिट्टी बाजार पहुंचने का आरोप
ग्रामीणों का दावा है कि मिट्टी निकासी के लिए सरकारी कार्यों का हवाला दिया जा रहा है, जबकि बड़ी मात्रा में मिट्टी खुले बाजार में बेची जा रही है। लोगों का कहना है कि अनुमति का नाम लेकर पूरे मामले को वैध दिखाने की कोशिश की जा रही है, जबकि जमीन पर स्थिति इससे अलग दिखाई देती है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि अनुमति केवल सरकारी परियोजनाओं के लिए है, तो फिर मिट्टी निजी स्थानों तक कैसे पहुंच रही है।

मुंशीगंज शहीद स्मारक और अन्य स्थानों का भी लिया जा रहा नाम
स्थानीय लोगों के अनुसार, निकाली जा रही मिट्टी को मुंशीगंज शहीद स्मारक में उपयोग किए जाने की बात कही जाती है, लेकिन उनका आरोप है कि इसका बड़ा हिस्सा बाजार में खपाया जा रहा है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि 14वीं पीएसी रोड और परशदेपुर रोड के पास नहर किनारे भी लगातार खुदाई की जा रही है। उनका कहना है कि वहां से निकाली गई मिट्टी को भी दूसरे क्षेत्रों में बेचने का काम हो रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि यदि राजस्व और खनन विभाग नियमित निरीक्षण करें तो रात के अंधेरे में होने वाली ऐसी गतिविधियों पर आसानी से रोक लगाई जा सकती है। लोगों का आरोप है कि भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से ग्रामीण सड़कें भी प्रभावित हो रही हैं। इससे धूल, शोर और आवागमन की समस्या बढ़ रही है, जिसका असर आसपास रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है।
जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, खनन स्थलों का मौके पर निरीक्षण कराने और यदि आरोप सही पाए जाएं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मिट्टी निकासी निर्धारित नियमों के तहत हो रही है या फिर सरकारी कार्यों की आड़ में अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा है। अब लोगों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
नोट: यह समाचार स्थानीय ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। संबंधित विभाग या प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर समाचार को अपडेट किया जा सकता है।










