Ramgarh MGNREGA: झारखंड में मनरेगा के बेहतर क्रियान्वयन को लेकर रामगढ़ जिले ने नया मुकाम हासिल किया है। ग्रामीण विकास विभाग की वित्तीय वर्ष 2025-26 की समीक्षा में जिले को राज्यभर में पहला स्थान मिला है। यह उपलब्धि केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार, महिला सशक्तिकरण, कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले कई प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है। जिले ने निर्धारित लक्ष्यों को समय से पहले पूरा कर यह साबित किया कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन ग्रामीण विकास की दिशा बदल सकता है।
100 दिन का रोजगार देकर बनाया राज्य में नया रिकॉर्ड
रामगढ़ जिले ने मनरेगा के तहत 2,529 लाभार्थियों को पूरे 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया। इस उपलब्धि के साथ जिला इस श्रेणी में पूरे झारखंड में पहले स्थान पर पहुंच गया। वहीं जिले को 25.34 लाख मानव दिवस सृजन का जो लक्ष्य मिला था, उसे भी शत-प्रतिशत पूरा किया गया। इससे हजारों ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला और पलायन की आवश्यकता भी कम हुई।

मुख्य उपलब्धियां
- 2,529 परिवारों को पूरे 100 दिन का रोजगार।
- 25.34 लाख मानव दिवस सृजन का लक्ष्य 100 प्रतिशत पूरा।
महिलाओं की भागीदारी ने बदली गांवों की तस्वीर
मनरेगा के कार्यों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी रामगढ़ की सफलता का अहम आधार बनी। जिले में कुल सृजित रोजगार का 53 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं के नाम रहा। इससे बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला। प्रशासन का मानना है कि महिला सहभागिता बढ़ने से परिवारों की आय में स्थिरता आई है और गांवों में सामाजिक बदलाव भी देखने को मिला है।
समय पर मजदूरी भुगतान और डिजिटल व्यवस्था बनी मिसाल
रामगढ़ जिले ने मजदूरी भुगतान के मामले में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सभी पात्र मजदूरों को कार्य पूरा होने के 15 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया गया और 100 प्रतिशत समयबद्ध भुगतान का रिकॉर्ड दर्ज किया गया। इसके साथ ही मनरेगा मजदूरों का ई-केवाईसी कार्य भी पूरी तरह पूरा किया गया। नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने में भी जिला राज्य के शीर्ष प्रदर्शनकर्ताओं में शामिल रहा।
सिंचाई, आवास और हरित योजना ने बढ़ाई ग्रामीण समृद्धि
मनरेगा के माध्यम से केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी तेजी से हुआ। बिरसा सिंचाई कूप योजना के तहत 20,221 सिंचाई कूपों का निर्माण पूरा किया गया। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), अबुआ आवास योजना और अंबेडकर आवास योजना के निर्माण कार्यों को भी मनरेगा से जोड़कर गति दी गई। दूसरी ओर बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत करीब 4,500 एकड़ भूमि पर आम की बागवानी विकसित की गई, जिससे किसानों को दीर्घकालिक आय का नया स्रोत मिला।
विदेशों तक पहुंचा रामगढ़ का आम, किसानों के लिए खुला नया बाजार
रामगढ़ की सफलता का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि मनरेगा से विकसित बागानों में उत्पादित लगभग छह टन आम का विदेशों में निर्यात किया गया। यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि मनरेगा अब केवल मजदूरी उपलब्ध कराने वाली योजना नहीं रही, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनती जा रही है। आम के निर्यात से जिले के बागवानी मॉडल को नई पहचान मिली है और भविष्य में अन्य किसानों के लिए भी नए अवसर खुलने की उम्मीद बढ़ी है।










