Sawan 2026: रामगढ़ जिले का प्रसिद्ध टूटी झरना महादेव मंदिर सोमवार को श्रद्धा और भक्ति के रंग में पूरी तरह डूबा नजर आया। सावन की पहली सोमवारी के अवसर पर सुबह होने से पहले ही मंदिर परिसर में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दराज के जिलों और पड़ोसी राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयकारों और घंटियों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
जहाँ बिना रुके होता है शिवलिंग का प्राकृतिक जलाभिषेक
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसे देश के अन्य शिव मंदिरों से अलग पहचान दिलाती है। गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग के ऊपर माँ गंगा की प्रतिमा विराजमान है, जिसकी नाभि से निकलने वाली जलधारा दोनों हाथों से होती हुई सीधे शिवलिंग पर गिरती रहती है। यह जलाभिषेक दिन-रात, हर मौसम और पूरे वर्ष लगातार होता रहता है। इसी अद्भुत दृश्य को देखने के लिए हर साल सावन में हजारों श्रद्धालु यहाँ पहुंचते हैं।

रात दो बजे से शुरू हो गया था श्रद्धालुओं का आगमन
मंदिर के पुजारी शैलेश पांडे ने बताया कि पहली सोमवारी होने के कारण श्रद्धालुओं का आना रात करीब दो बजे से ही शुरू हो गया था। सुबह तक मंदिर परिसर पूरी तरह श्रद्धालुओं से भर गया। उनके अनुसार इस मंदिर की सबसे अनोखी पहचान यही है कि यहाँ माँ गंगा स्वयं भगवान शिव का अखंड जलाभिषेक करती हैं, जिसे देखने के बाद हर भक्त भाव-विभोर हो जाता है।
श्रद्धालुओं ने बताया—हर मनोकामना होती है पूरी
मंदिर पहुंचीं श्रद्धालु माही सिंह ने बताया कि वह हर सावन सोमवार को यहां दर्शन के लिए आती हैं। उनके अनुसार मंदिर का वातावरण बेहद शांत और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहता है। वहीं श्रद्धालु प्रज्ञा का कहना है कि यह अत्यंत प्राचीन और चमत्कारिक शिवधाम है। उनकी मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं यहां अवश्य पूरी होती हैं, इसलिए वह हर वर्ष सावन में दर्शन करने आती हैं।
भीड़ को नियंत्रित करने में जुटा रहा पुलिस प्रशासन
पहली सोमवारी को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। कुजू थाना के एसआई अभिनव कुमार ने बताया कि पुलिस बल तड़के ढाई से तीन बजे के बीच ही मंदिर परिसर में तैनात हो गया था। श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रही, लेकिन सुव्यवस्थित व्यवस्था के कारण दर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होते रहे और कहीं भी अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनी।
करीब सौ साल पहले दुनिया के सामने आया था यह रहस्यमयी मंदिर
टूटी झरना महादेव मंदिर का वास्तविक इतिहास आज भी रहस्य बना हुआ है। यह मंदिर किस युग में बना और इसका निर्माण किसने कराया, इसका कोई प्रमाणिक उल्लेख उपलब्ध नहीं है। हालांकि स्थानीय मान्यताओं में इसे अत्यंत प्राचीन शिवधाम माना जाता है। वर्ष 1925 में गोमो-बरकाकाना रेल लाइन निर्माण के दौरान अंग्रेज अधिकारियों को खुदाई में मिट्टी से ढका गुंबदनुमा ढांचा मिला था। इसके बाद जब खुदाई आगे बढ़ी तो यह अद्भुत मंदिर सामने आया। तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।










