Shibu Soren First Death Anniversary: हेमंत सोरेन ने पैतृक गांव में ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा का किया अनावरण, लाभुकों को बांटी परिसंपत्तियां

Shibu Soren First Death Anniversary: रामगढ़ के नेमरा में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया और विकास मेला में लाभुकों को परिसंपत्तियां वितरित कीं।

Shibu Soren First Death Anniversary: झारखंड की राजनीति और आदिवासी अस्मिता के सबसे बड़े प्रतीकों में गिने जाने वाले ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि मंगलवार को उनके पैतृक गांव नेमरा (लुकाया टांड़), रामगढ़ में पूरे सम्मान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण क्षण तब आया, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया। प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते समय माहौल भावुक हो उठा और उपस्थित लोगों ने अपने प्रिय नेता को श्रद्धांजलि दी।

परिवार की विरासत को किया नमन, शहीद सोबरन मांझी को भी दी श्रद्धांजलि

प्रतिमा अनावरण के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पैतृक आवास पहुंचे, जहां उन्होंने परिवार के सदस्यों के साथ सामाजिक परंपराओं का पालन करते हुए शिबू सोरेन के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद वे अपने दादा और स्वतंत्रता चेतना के प्रतीक शहीद सोबरन मांझी के स्मारक स्थल पहुंचे तथा उन्हें भी नमन किया। इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों और पार्टी कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या मौजूद रही।

विकास मेला बना सरकारी योजनाओं का बड़ा मंच

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के साथ ही नेमरा-लुकाया टांड़ मैदान में ‘विकास मेला सह परिसंपत्ति वितरण कार्यक्रम’ का आयोजन भी किया गया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के चयनित लाभुकों को परिसंपत्तियां और सहायता सामग्री वितरित की। कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाना और विकास कार्यों को गति देना रहा।

कार्यक्रम के दौरान लाभुकों को विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता प्रदान की गई, जिनमें प्रमुख रूप से—

  • विभिन्न स्वरोजगार एवं आजीविका योजनाओं की परिसंपत्तियों का वितरण।
  • पात्र लाभुकों को सरकारी योजनाओं से जुड़ी सहायता सामग्री उपलब्ध कराई गई।

मंत्री, विधायक और हजारों लोग बने आयोजन के साक्षी

नेमरा में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के कई मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। गांव और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और युवा भी कार्यक्रम में शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जबकि स्थानीय लोगों ने पारंपरिक तरीके से अतिथियों का स्वागत किया।

दिशोम गुरु की विरासत को याद करने का दिन

शिबू सोरेन का नाम झारखंड आंदोलन और आदिवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई से जुड़ा रहा है। उनकी पहली पुण्यतिथि पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे विकास और जनकल्याण से जोड़ने का प्रयास भी किया गया। प्रतिमा अनावरण और परिसंपत्ति वितरण के जरिए सरकार ने उनके विचारों और सामाजिक योगदान को याद करते हुए विकास के संदेश को भी आगे बढ़ाया।

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