आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- “जरूरत पड़े तो आंखें नहीं मूंद सकते”

देशभर में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों और डॉग बाइट के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा कि लोगों की जान और सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि कई राज्यों और नगर निकायों ने इस समस्या को रोकने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें पहले दिए गए आदेश को वापस लेने की मांग की गई थी। पहले कोर्ट ने निर्देश दिया था कि अस्पताल, स्कूल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और दूसरी सार्वजनिक जगहों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को दोबारा वहीं न छोड़ा जाए।

कोर्ट ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह इस मुद्दे पर आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकता। अदालत ने साफ किया कि इंसानों का सुरक्षित वातावरण में जीना भी संवैधानिक अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 5 बड़ी बातें

  1. सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों को वापस नहीं छोड़ा जाएगा

सुप्रीम Court ने अपने पुराने आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि स्कूल, अस्पताल, बाजार, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों से हटाए गए कुत्तों को फिर उसी इलाके में छोड़ना ठीक नहीं है। अदालत का मानना है कि इससे लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

  1. लोगों की सुरक्षा को बताया सबसे बड़ा अधिकार

कोर्ट ने कहा कि संविधान सिर्फ जानवरों की सुरक्षा की बात नहीं करता, बल्कि इंसानों को सुरक्षित माहौल में जीने का अधिकार भी देता है। अगर बच्चे, बुजुर्ग और आम लोग डर के माहौल में रहेंगे तो यह सही नहीं माना जा सकता।

सुनवाई के दौरान जजों ने कहा कि हर दिन डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं और कई बार छोटे बच्चों और बुजुर्गों की जान तक चली जाती है।

  1. राज्यों और नगर निकायों की लापरवाही पर नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और स्थानीय प्रशासन को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि Animal Birth Control Rules यानी नसबंदी और वैक्सीनेशन के नियम तो बने हुए हैं, लेकिन जमीन पर उनका सही पालन नहीं हो रहा।

कोर्ट ने माना कि कई जगह सिर्फ कागजों में काम दिखाया जा रहा है, जबकि वास्तविक स्थिति बेहद खराब है। अदालत ने इसे “सिस्टम की नाकामी” तक बताया।

  1. डॉग फीडर्स पर भी उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उन लोगों पर भी सवाल उठाए जो आवारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं। अदालत ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति कुत्तों को खाना खिलाता है तो उसे यह भी देखना चाहिए कि उन कुत्तों से आम लोगों को परेशानी न हो।

कोर्ट की टिप्पणी थी कि अगर लोग इतने ही चिंतित हैं तो कुत्तों को अपने घरों में रखें। अदालत ने यह भी कहा कि सिर्फ भावनात्मक बातें करने से समस्या हल नहीं होगी।

  1. खतरनाक और रेबीज वाले कुत्तों पर सख्ती

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि रेबीज से संक्रमित या बेहद आक्रामक कुत्तों के मामले में सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में लोगों की जान बचाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि जानवरों के साथ क्रूरता नहीं होनी चाहिए और कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई की जाए।

क्यों बढ़ रहा है डॉग बाइट का खतरा?

देश के कई शहरों में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कई जगह नसबंदी और वैक्सीनेशन कार्यक्रम सही तरीके से नहीं चल रहे। इसके अलावा खुले में कूड़ा फेंकने और खाने की उपलब्धता भी कुत्तों की संख्या बढ़ाने की बड़ी वजह मानी जा रही है।

ग्रामीण और शहरी इलाकों में हर साल लाखों लोग डॉग बाइट का शिकार होते हैं। बच्चों पर हमलों के मामले सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाते हैं।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्यों और नगर निगमों पर दबाव बढ़ेगा। अब उन्हें आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने, नसबंदी बढ़ाने, वैक्सीनेशन करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

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