आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव एवं प्रवक्ता संजय मेहता ने विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग में चल रही गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार, नेपोटिज्म और नियम-विरुद्ध भुगतानों के मामले में 01 अप्रैल 2026 को विश्वविद्यालय के कुलसचिव को एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजा था।
शिकायत में मुख्य रूप से जय प्रकाश सिंह (तकनीकी सहायक, जो उप-कुलपति कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं) के विरुद्ध उन्होंने गंभीर आरोप लगाए थे।

संजय मेहता का आरोप है कि –
- जय प्रकाश सिंह द्वारा नियम विरुद्ध दो प्रकार के विशेष भत्ते (₹2000 + ₹3000 प्रति माह) के साथ ओवरटाइम भत्ता लिया जाता है।
- अपनी पत्नी को लाइफ साइंसेज विभाग में बिना उचित योग्यता के अनुबंध पर उन्होंने नियुक्त कराया है।
- शोध छात्रों (NET JRF) से पैसे वसूलने तथा छात्रों से PhonePe यूपीआई के माध्यम से भुगतान लेने के गंभीर आरोप।
- विश्वविद्यालय में कार्यरत सुरक्षा एजेंसी से भारी रकम वसूलना तथा ठेके को अनुचित रूप से बढ़ाना।
संजय मेहता ने इन आरोपों में उच्च अधिकारियों की मिलीभगत का भी उल्लेख किया था।
विश्वविद्यालय का जवाबी पत्र पूरी तरह से मामला दबाने का प्रयास
इस शिकायत के जवाब में विश्वविद्यालय ने 11 अप्रैल 2026 को जो पत्र जारी किया है, वह कार्रवाई शुरू करने के बजाय मामले को दबाने और शिकायतकर्ता को परेशान करने की मंशा प्रतीत होता है।
विश्वविद्यालय ने शिकायत की जांच शुरू करने के बजाय संजय मेहता से एफिडेविट, आधार कार्ड की कॉपी और लिखित घोषणा मांगी है कि शिकायत उन्होंने खुद तैयार की है और उस पर वे कायम हैं।
विश्वविद्यालय का रवैया दुःखद, करप्शन को दिया जा रहा है बढ़ावा: संजय मेहता
संजय मेहता ने स्पष्ट किया की सार्वजनिक हित में विश्वविद्यालय जैसे सार्वजनिक संस्थान में हो रहे भ्रष्टाचार की शिकायत करना मेरा कर्तव्य है।
विश्वविद्यालय प्रबंधन बिना शिकायत की जाँच किए हमसे ही शपथ पत्र माँग रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन को तुरंत शिकायत के आरोपों पर उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच समिति गठित कर आरोपों की जांच करनी चाहिए, न कि शिकायतकर्ता को अनावश्यक दस्तावेज मांगकर मामले को टालने या दबाने का प्रयास करना चाहिए।
संजय मेहता ने मांग की है कि –
- विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच समिति गठित करे, जिसमें बाहरी सदस्य (उच्च शिक्षा विभाग या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी) शामिल हों।
- सभी आरोपों की समयबद्ध जांच हो और दोषी पाए जाने वालों (चाहे वे कोई भी अधिकारी हों) के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा की सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और छात्रों-शोधार्थियों के शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आजसू पार्टी और संजय मेहता इस मामले को सार्वजनिक हित में लगातार उठाते रहेंगे। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन अभी भी जांच से बचता है तो उच्च शिक्षा विभाग, राज्यपाल (कुलाधिपति) और संबंधित जांच एजेंसियों का रुख किया जाएगा।










