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मजबूर दिखे जिला विद्यालय निरीक्षक, कहा हम कर ही क्या लेंगे ? प्राइवेट विद्यालय मानक को पूरा ही नहीं करते

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जिले में सरकारी स्कूलों की अपेक्षा कई गुना अधिक प्राइवेट विद्यालयों की स्थापना हो चुकी है और वह धड़ल्ले से संचालित भी हैं। सरकारी विद्यालयों की अपेक्षा प्राइवेट विद्यालयों में बच्चों की संख्या भी कई गुना अधिक है। प्राइवेट विद्यालयों के इमारत की चमक दमक, आधुनिक सुविधाएं अभिभावकों को लुभाती हैं। जिसके कारण प्राइवेट विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। ऐसे भी कुछ अभिभावक हैं, जो सरकारी विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं और प्राइवेट विद्यालयों में अपने बच्चों का दाखिला कराने पर अपनी शान। परंतु इन्हीं प्राइवेट विद्यालयों में कुछ ऐसे विद्यालय हैं जो कि सुविधाओं और व्यवस्थाओं के नाम पर अभिभावकों से फीस तो ले लेते हैं, लेकिन उनके बच्चों को विद्यालय के अंदर अधूरी व्यवस्था और सुविधाएं ही मिल पाती हैं। यहां तक विद्यालय में शिक्षकों की कमी भी पाई जाती है जो वर्ष भर पूरी नहीं होती। इसके खिलाफ ना तो अभिभावक कुछ बोल पाता और ना ही अध्यनरत बच्चे, साल के अंत तक जाते-जाते परिणाम यह होता है कि अगले वर्ष वही अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला एकप्राइवेट स्कूल से निकाल कर दूसरे प्राइवेट स्कूल में करा देते हैं, लेकिन प्राइवेट विद्यालय की समस्याओं पर कोई सवाल करने की जहमत नहीं उठाता है। जैसे कि विगत कई दिनों से ऊंचाहार क्षेत्र के चर्चित डीएवी पब्लिक स्कूल में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया गया था। यहां गौरतलब है कि जब जिले का शिक्षा विभाग ही प्राइवेट विद्यालयों की मनमानी को देखते हुए भी जैसे एक अदृश्य शक्तियों के दबाव में चुप्पी साध कर बैठा हो, तो कोई अभिभावक भी कैसे सवाल जवाब कर सकता है.?

इस समय विद्यालयों में नए सत्र 2024 का आगाज हो चुका है, तेजी के साथ विद्यालय में एडमिशन लिए जा रहे हैं। अभिभावक लगातार कुछ विद्यालयों पर आरोप लगा रहे हैं कि उनके यहां शिक्षकों की कमी है और फीस लेने के बावजूद उनके बच्चों को अधूरी शिक्षा ही दी जाती है। इस पर रायबरेली जिले के जिला विद्यालय निरीक्षक ओमकार राणा से जब बात की गई तो उनकी बातों से मानो प्राइवेट विद्यालयों के समर्थन में खड़ी कुछ अदृश्य शक्तियों का दबाव दिखा, जिससे वह बचते नजर आए। उन्होंने कहा कि प्राइवेट विद्यालय मानक को पूरा ही नहीं करते हैं। अभिभावकों को चाहिए कि सरकारी स्कूलों में ही बच्चों का दाखिला कराएं, परंतु सवाल यह है कि जब जिला विद्यालय निरीक्षक ओमकार राणा सरकारी विद्यालयों में ही दाखिला दिलाने के लिए इतना दबाव बना रहे हैं, तो फिर अनगिनत खुले प्राइवेट विद्यालयों को नोटिस जारी करके इन्हें बंद ही करा देना चाहिए। आखिर इन प्राइवेट विद्यालयों को मान्यता तो शिक्षा विभाग ही देता है।

अंततः अदृश्य शक्तियों के दबाव में ड्यूटी कर रहे जिला विद्यालय निरीक्षक ओमकार राणा ने कहा कि आख़िर प्राइवेट विद्यालयों का हम कर ही क्या लेंगे.? जांच के लिए यदि हम जाएंगे भी तो उस समय उनके विद्यालय के सारे डॉक्यूमेंट और कोरम पूरे होंगे और हमारे वापस आते ही सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा। साथी बात पूरी होने से पहले ही जिला विद्यालय निरीक्षक ओमकार राणा ने अपने फोन को होल्ड पर रख दिया और धीरे से फोन को कट कर दिया। यानी कि अब ऐसे विद्यालयों पर कार्यवाही करना संभव नहीं है और जिले के आलाधिकारी 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं। विद्यालयी बच्चों के भविष्य और खासतौर पर रायबरेली जिले के अंदर शिक्षा के गिरते स्तर पर चिंतन करने के लिए किसी के पास समय नहीं है।

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