TET Exemption Serving Teachers: सरकारी टीचरों को TET की अनिवार्यता से मिल सकती है बड़ी राहत,केंद्र सरकार ने दिया सकारात्मक संकेत

TET Exemption Serving Teachers: TET पास न करने वाले सरकारी टीचर्स को मिलेगी छूट? केंद्र का बड़ा कदम, रिपोर्ट मांगी गई

TET Exemption Serving Teachers: देश भर के लाखों सरकारी शिक्षकों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के फैसले के बाद टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) या CTET पास करना अनिवार्य हो गया था, जिससे करीब 12 लाख पुराने शिक्षकों की नौकरी और प्रमोशन पर संकट मंडरा रहा था। लेकिन अब केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों से पुराने शिक्षकों का पूरा ब्योरा मांगा है, जो TET अनिवार्यता से छूट की संभावना को मजबूत करता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से क्या हुआ था समस्या?/TET Exemption Serving Teachers

सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को फैसला दिया कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों को TET पास करना जरूरी है। जिन शिक्षकों की सेवा में 5 साल से ज्यादा बाकी है, उन्हें 2 साल के अंदर TET क्वालीफाई करना होगा, वरना नौकरी जा सकती है या प्रमोशन नहीं मिलेगा। केवल 5 साल से कम सेवा बाकी वाले शिक्षकों को छूट मिली है (बशर्ते प्रमोशन न मांगें)।

यह फैसला RTE एक्ट 2009 और NCTE नियमों पर आधारित था। इससे पहले 2010 से TET अनिवार्य था, लेकिन पुराने शिक्षकों (2011 से पहले नियुक्त) को छूट मिली हुई थी। कोर्ट के आदेश से लाखों शिक्षक मानसिक दबाव में थे – वे बच्चों को पढ़ाएं या TET की तैयारी करें? कई राज्यों में शिक्षक संगठनों ने विरोध किया, रिव्यू पिटीशन दाखिल कीं, और केंद्र से छूट की मांग की।

केंद्र सरकार का नया कदम, सभी राज्यों से मांगी रिपोर्ट

जनवरी 2026 की शुरुआत में शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखा। इसमें मांगा गया है:

  • 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों का पूरा विवरण (संख्या, उम्र, शैक्षणिक योग्यता, प्रशिक्षण आदि)।
  • TET अनिवार्यता के प्रभाव पर टिप्पणियां।
  • प्रभावित शिक्षकों की स्थिति।

यह कदम साफ संकेत देता है कि केंद्र सरकार पुराने शिक्षकों को स्थायी या आंशिक छूट देने पर विचार कर रही है। शिक्षक संगठनों ने इसकी सराहना की है। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया जैसे संगठन कहते हैं कि यह फैसला लाखों अनुभवी शिक्षकों की सेवा बचाएगा।

कितने शिक्षकों को फायदा हो सकता है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश भर में करीब 12 लाख सरकारी शिक्षक ऐसे हैं जो TET पास नहीं कर पाए हैं, क्योंकि उनकी नियुक्ति TET लागू होने से पहले हुई थी। ये शिक्षक सालों से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, लेकिन अब नौकरी का डर सता रहा था। केंद्र की रिपोर्ट मांगने की वजह से उम्मीद बढ़ी है कि:

  • सेवारत शिक्षकों को TET से स्थायी छूट मिल सकती है।
  • या कम से कम प्रमोशन और सेवा सुरक्षा के लिए राहत दी जा सकती है।
  • कुछ मामलों में ब्रिज कोर्स या स्पेशल TET के जरिए आसान रास्ता निकाला जा सकता है।

शिक्षकों और संगठनों की मांग क्या है?

शिक्षक यूनियनों का कहना है कि नियुक्ति के समय TET अनिवार्य नहीं था, तो अब इसे लागू करना अन्याय है। वे RTE एक्ट में संशोधन या सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू की मांग कर रहे हैं। कई राज्य सरकारें (जैसे यूपी, तमिलनाडु, केरल) भी केंद्र के साथ मिलकर छूट की पैरवी कर रही हैं।

निष्कर्ष

  • केंद्र सभी राज्यों की रिपोर्ट देखकर NCTE या कैबिनेट में फैसला ले सकता है।
  • अगर छूट मिली, तो पुराने शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित रहेगी और वे बिना टेंशन के पढ़ा सकेंगे।
  • नई भर्तियों में TET अनिवार्य रहेगा, लेकिन पुराने शिक्षकों को राहत मिलने से स्कूलों में शिक्षक संकट नहीं आएगा।

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