Cow Milk vs Buffalo Milk Brain: गाय का दूध दिमाग तेज, भैंस का सुस्त बनाता है? राजस्थान मंत्री का चौंकाने वाला दावा!

Cow Milk vs Buffalo Milk Brain: भैंस का दूध पीने से बच्चे 'बुद्धि से भ्रष्ट'? मदन दिलावर का वायरल बयान, एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?

Cow Milk vs Buffalo Milk Brain: राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने एक बार फिर विवादों में अपनी एंट्री कर ली है। कोटा जिले में ‘गो-संवर्धन और गोचारण’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया कि देसी गाय (खासकर ऊंची पीठ वाली) का दूध बच्चों की बुद्धि और ऊर्जा बढ़ाता है, जबकि भैंस का दूध उन्हें सुस्त, आलसी और मानसिक रूप से कमजोर बना देता है। मंत्री ने एक अनोखा उदाहरण भी दिया – गाय और भैंस के नवजात बछड़ों को विपरीत दिशा में छोड़ने पर गाय का बछड़ा सीधे मां के पास जाता है, जबकि भैंस का बछड़ा मुश्किल से ढूंढ पाता है। इससे उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि गाय का दूध बुद्धिमान बनाता है और भैंस का दूध ‘मन से भ्रष्ट’ करता है।

यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई लोगों ने इसे हास्यास्पद बताया, तो कुछ ने इसे सांस्कृतिक या आयुर्वेदिक आधार पर सही ठहराने की कोशिश की। लेकिन सवाल यह है – क्या सच में गाय का दूध भैंस के दूध से दिमाग के लिए बेहतर है? क्या कोई वैज्ञानिक आधार है इस दावे का? आइए पोषण विशेषज्ञों, अध्ययनों और तथ्यों के आधार पर समझते हैं।

मंत्री के दावे की पृष्ठभूमि/Cow Milk vs Buffalo Milk Brain

मदन दिलावर ने रामगंज मंडी क्षेत्र में गोवर्धन ग्वाला योजना के तहत यह बात कही। उन्होंने कहा, “ऊंची पीठ वाली देसी गाय का दूध पीने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है, जबकि भैंस का दूध पीने वाले सुस्त स्वभाव के होते हैं।” उन्होंने बच्चों को चंचल बनाने के लिए गाय का दूध और सुस्त बनाने के लिए भैंस का दूध देने की सलाह दी। यह बयान राजस्थान में पहले से चर्चित मंत्री के अन्य विवादास्पद बयानों की कड़ी में जुड़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने मजाक उड़ाया कि “भैंस का दूध पीने वाले मंत्री खुद सुस्त कैसे नहीं हैं?” लेकिन आपको बता दें कि स्वास्थ्य के नजरिए से यह दावा कितना सही है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।

गाय और भैंस के दूध की पोषण तुलना

दोनों दूध पौष्टिक हैं, लेकिन उनकी संरचना में फर्क है:

  • फैट कंटेंट: गाय के दूध में फैट 3-4% होता है, जबकि भैंस के दूध में 6-8% या इससे ज्यादा। इससे भैंस का दूध ज्यादा कैलोरी वाला और गाढ़ा होता है।
  • प्रोटीन और मिनरल्स: भैंस के दूध में प्रोटीन, कैल्शियम, फॉस्फोरस और विटामिन B12 की मात्रा थोड़ी ज्यादा होती है। विटामिन B12 नर्व हेल्थ और ब्रेन फंक्शन के लिए जरूरी है।
  • पाचन: गाय का दूध हल्का और आसानी से पचने वाला माना जाता है, खासकर छोटे बच्चों के लिए। भैंस का दूध भारी होता है, जिससे कुछ लोगों को डाइजेशन की समस्या हो सकती है।
  • अन्य पोषक तत्व: आयोडीन (ब्रेन डेवलपमेंट के लिए महत्वपूर्ण) दोनों में पशु के आहार पर निर्भर करता है, न कि नस्ल पर।

पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, भैंस का दूध ज्यादा न्यूट्रिएंट-डेंस है और ताकत बढ़ाने, वजन बढ़ाने या मेहनत करने वालों के लिए बेहतर हो सकता है। गाय का दूध कम कैलोरी वाला होने से वजन कंट्रोल और हल्के पाचन के लिए पसंद किया जाता है।

दिमाग और बुद्धि पर असर: वैज्ञानिक सच्चाई

पोषण विशेषज्ञों और बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि गाय का दूध भैंस के दूध से बच्चों की बुद्धि या IQ बढ़ाने में बेहतर नहीं है। कोई ठोस वैज्ञानिक अध्ययन ऐसा नहीं मिलता जो यह साबित करे कि गाय का दूध ब्रेन डेवलपमेंट में श्रेष्ठ है।

  • दिल्ली स्थित नेशनल डायबिटीज, ओबेसिटी एंड कोलेस्ट्रॉल फाउंडेशन की न्यूट्रिशन रिसर्चर डॉ. सीमा गुलाटी ने कहा कि फैट और कैलोरी का फर्क मेटाबॉलिज्म से जुड़ा है, ब्रेन हेल्थ से नहीं।
  • ब्रेन हेल्थ के लिए जरूरी पोषक तत्व जैसे विटामिन B12, आयोडीन, DHA आदि दोनों दूध में मौजूद हैं, लेकिन मात्रा में मामूली फर्क है। ब्रेन डेवलपमेंट ज्यादातर कुल आहार, नींद, शिक्षा और पर्यावरण पर निर्भर करता है।
  • कुछ अध्ययनों में दूध (खासकर गाय का) में मौजूद न्यूट्रिएंट्स GSH (glutathione) बढ़ाते हैं, जो ब्रेन हेल्थ के लिए अच्छा है, लेकिन यह दोनों दूधों में समान रूप से लागू होता है।
  • आयुर्वेद में गाय का दूध हल्का, सात्विक और दिमाग के लिए अच्छा माना जाता है, जबकि भैंस का भारी और ठंडा। लेकिन यह पारंपरिक मान्यता है, आधुनिक विज्ञान से सिद्ध नहीं।

एक साल से कम उम्र के बच्चों को दोनों दूध नहीं देने चाहिए। 1-2 साल के लिए गाय का और उसके बाद दोनों ठीक हैं।

निष्कर्ष

राजस्थान मंत्री मदन दिलावर का दावा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं ठहरता। यह पुरानी धारणाओं या सांस्कृतिक विश्वास पर आधारित लगता है, न कि प्रमाणित रिसर्च पर। दोनों दूध फायदेमंद हैं – गाय का हल्का और भैंस का पौष्टिक। बच्चों के लिए दूध का चुनाव उनकी उम्र, पाचन क्षमता, स्वास्थ्य स्थिति और फैमिली की जरूरतों के आधार पर होना चाहिए, न कि किसी मंत्री के बयान पर।

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