रायबरेली-लखनऊ-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग पर बरगद चौराहे से लेकर मामा चौराहे तक अतिक्रमण का मामला गंभीर रूप लेता जा रहा है। हाईवे किनारे रेलवे और नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) की जमीन पर बने सरकारी नाले के ऊपर अवैध रूप से दर्जनों नर्सरियां संचालित की जा रही हैं। इतना ही नहीं, पैदल चलने वालों के लिए बने फुटपाथ तक पर कब्जा कर लिया गया है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह नर्सरियां पूरी तरह अवैध रूप से संचालित हो रही हैं और प्रशासन की नजरों के सामने ही यह अतिक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। फुटपाथ पर कब्जा होने के कारण राहगीरों को मजबूरन हाईवे पर चलना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।

गौरतलब है कि समय-समय पर जिला प्रशासन, नगर पालिका और NHAI द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन इन अभियानों का असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देता। सवाल यह उठ रहा है कि जब स्पष्ट रूप से सरकारी जमीन और फुटपाथ पर कब्जा हो रहा है, तो जिम्मेदार विभाग आखिर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि बिना किसी संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर अतिक्रमण संभव नहीं है। लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि आखिर किसके संरक्षण में ये नर्सरियां संचालित हो रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाएगा।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन, नगर पालिका और NHAI इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कब तक हाईवे को अतिक्रमण मुक्त कराया जाता है।










