Rewa Hospital Negligence Case: रीवा जिले में एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। यहां के गांधी स्मारक चिकित्सालय (जिसे संजय गांधी अस्पताल के नाम से भी जाना जाता है) में बच्चेदानी के ऑपरेशन के बाद एक महिला की मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों और स्टाफ पर बड़ी लापरवाही का आरोप लगाया है। यह अस्पताल श्याम शाह मेडिकल कॉलेज से जुड़ा हुआ है और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला का गृह जिला होने के कारण यह मामला और भी चर्चा में आ गया है।
घटना की पूरी जानकारी/Rewa Hospital Negligence Case
मृतका सुनीता कुशवाहा करहिया गांव, चौराहटा थाना क्षेत्र की रहने वाली थीं। करीब एक महीने पहले उन्हें बच्चेदानी (हिस्टेरेक्टॉमी) का ऑपरेशन कराने के लिए इस अस्पताल में भर्ती किया गया था। ऑपरेशन सफल रहा और शुरुआत में उनकी हालत सामान्य बताई गई। लेकिन पिछले 2-3 दिनों से रात के समय उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।

परिजनों के अनुसार, जब भी सुनीता की हालत खराब होती, उनके पति श्रीनिवास कुशवाहा और अन्य रिश्तेदार वार्ड में मौजूद डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को बार-बार सूचना देते रहे। लेकिन आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात कुछ जूनियर डॉक्टर और स्टाफ इलाज करने के बजाय मोबाइल पर रील्स स्क्रोल करने में व्यस्त रहे। कई बार गुहार लगाने के बावजूद समय पर कोई गंभीर ध्यान नहीं दिया गया। नतीजा यह हुआ कि बुधवार देर रात सुनीता की मौत हो गई।
परिजनों का गुस्सा और हंगामा
महिला की मौत की खबर फैलते ही परिजन बहुत गुस्से में आ गए। उन्होंने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। परिजनों का कहना था कि अगर डॉक्टरों ने समय पर ध्यान दिया होता तो शायद सुनीता की जान बचाई जा सकती थी। गुस्साए लोगों ने अस्पताल का माहौल गरमा दिया। सूचना मिलते ही अमहिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने परिजनों को जांच का भरोसा दिलाया और मामले को शांत कराया। इसके बाद परिजन शव लेकर घर रवाना हो गए।
अस्पताल प्रबंधन का जवाब
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिला की हालत पहले से ही काफी गंभीर थी। सुपर स्पेशलिटी के डॉक्टर भी उन्हें देख रहे थे। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप – जैसे रील देखना और इलाज में लापरवाही – बहुत गंभीर हैं। अस्पताल प्रबंधन ने इनकी जांच शुरू कर दी है। अगर जांच में किसी की गलती साबित होती है तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल
यह घटना सिर्फ एक इंसानी ट्रेजडी नहीं है, बल्कि रीवा जिले की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल रही है। रीवा में कलेक्टर की मौजूदगी है, बड़ा मेडिकल कॉलेज है, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल है, फिर भी हालात इतने खराब क्यों हैं? उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला का गृह जिला होने के बावजूद यहां के सरकारी अस्पतालों में बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
पिछले कुछ समय में संजय गांधी अस्पताल में कई बार लापरवाही के मामले सामने आए हैं – जैसे आईसीयू की बदहाली, नवजात की मौत, आग लगने जैसी घटनाएं। गरीब मरीजों के लिए सरकारी अस्पताल ही आखिरी सहारा होते हैं, लेकिन यहां स्टाफ की लापरवाही और संसाधनों की कमी से लोगों की जान जा रही है।
आम लोगों की पीड़ा और मांग
सुनीता कुशवाहा जैसी महिलाओं की मौत से पूरा परिवार तबाह हो जाता है। एक तरफ ऑपरेशन के बाद उम्मीद जगी थी, दूसरी तरफ मोबाइल पर व्यस्त स्टाफ की वजह से समय पर मदद नहीं मिली। परिजनों का दर्द समझा जा सकता है – वे कहते हैं कि अगर थोड़ा ध्यान दिया जाता तो शायद सब ठीक हो जाता।










