Odisha Wedding: प्यार में देश, महाद्वीप या बॉर्डर (Border) की कोई मायने नहीं रखती। यह बात एक बार फिर साबित हुई है ओडिशा के भद्रक जिले में। यहां एक ओडिया युवक शुकदेव ने क्रोएशिया (Croatia) की लड़की तमारा से हिंदू रीति-रिवाजों से शादी की है। यह अनोखी cross-cultural wedding भद्रक जिले के बासुदेवपुर ब्लॉक की नुआगांव पंचायत के उहाड़ गांव में हुई। शादी देखकर पूरा इलाका खुशी से झूम उठा। दूर यूरोप से आई तमारा ने ओडिया संस्कृति को इतना प्यार किया कि उन्होंने पूरी तरह भारतीय अंदाज में शादी रचाई।
Love Story की शुरुआत मालदीव से हुई/Odisha Wedding
शुकदेव उहाड़ गांव के सनातन और कमला सेठी के बेटे हैं। वे काफी पढ़े-लिखे हैं और मैनेजमेंट (management) की डिग्री पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में मालदीव (Maldives) चले गए। वहां होटल इंडस्ट्री में काम करते हुए उनकी मुलाकात तमारा से हुई। तमारा क्रोएशिया की एक खूबसूरत युवती हैं, जो उस समय यूरोप से घूमने मालदीव आई थीं।

शुरुआत में दोनों सिर्फ दोस्त बने। धीरे-धीरे बातें बढ़ीं और दोस्ती प्यार में बदल गई। शुकदेव ने तमारा को भारतीय संस्कृति, ओडिशा के रीति-रिवाज और अपनी जड़ों से रूबरू कराया। पांच साल तक दोनों ने लंबी डेटिंग (dating) की। वीडियो कॉल, मैसेज और कभी-कभी मिलने के बाद उन्होंने फैसला किया कि अब रिश्ते को शादी में बदलना है। यह लव स्टोरी (love story) सच में फिल्मी लगती है, लेकिन यह पूरी तरह सच्ची है।
परिवार को मनाने में लगा वक्त
शादी का फैसला आसान नहीं था। शुकदेव के परिवार को शुरू में इस अंतरराष्ट्रीय रिश्ते पर शक हुआ। लेकिन तमारा ने वीडियो कॉल पर परिवार से बात की, ओडिया संस्कृति के बारे में उत्सुकता दिखाई और उनका दिल जीत लिया। परिवार ने देखा कि तमारा सच में शुकदेव से प्यार करती हैं और ओडिशा की परंपराओं को सम्मान देती हैं।
आखिरकार दोनों परिवारों की सहमति मिल गई। तमारा अकेले क्रोएशिया से नई दिल्ली पहुंचीं। शुकदेव उन्हें भारत घुमाने ले गए – अलग-अलग जगहों पर घूमकर उन्होंने भारतीय जीवन को और करीब से समझा। फिर वे उहाड़ गांव पहुंचीं, जहां पूरा गांव उनकी स्वागत में उत्साहित था।
Sukhdev Tamara की ओडिया रीति-रिवाजों से हुई शादी
शादी (Marriage) का दिन तय होने पर दोनों कल्याण मंडप (wedding hall) में गए। यहां हिंदू वैदिक रीति-रिवाजों से शादी हुई। बाजा-गाजा, रसोइए और पारंपरिक सजावट के साथ अग्नि के सामने फेरे लिए गए। तमारा ने ओडिया दुल्हन की तरह गहरे रंग की साड़ी, लाल मोजे और पारंपरिक गहने पहने। वे पूजा की वेदी पर बैठीं और पूरी रस्में निभाईं।
यह शादी इलाके में चर्चा का विषय बन गई। लोग कह रहे हैं कि विदेशी बहू ने ओडिया परंपराओं को इतना अच्छे से अपनाया है कि देखकर मजा आ गया। शुकदेव का परिवार भी बहुत खुश है। उन्हें विदेशी बहू मिलने का गर्व है और वे तमारा को बेटी की तरह रख रहे हैं।
संस्कृति का सुंदर मिलन
यह शादी सिर्फ दो लोगों की नहीं, बल्कि दो अलग-अलग संस्कृतियों का मिलन है। एक तरफ ओडिशा की समृद्ध परंपराएं, दूसरी तरफ यूरोप की आधुनिक सोच। तमारा ने ओडिया खाना, भाषा और रीति-रिवाज सीखने की कोशिश की। शुकदेव ने भी तमारा की संस्कृति को समझा। दोनों ने एक-दूसरे का सम्मान किया, यही प्यार की असली ताकत है।
आज के दौर में जहां लोग छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते तोड़ लेते हैं, वहां शुकदेव और तमारा ने पांच साल इंतजार किया और हजारों किलोमीटर दूर से आकर एक हो गए।










