रायबरेली: प्रदेश सरकार की बहुचर्चित ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले में लघु सिंचाई कनेक्शन के नाम पर एक किसान से लाखों रुपये वसूलने और फिर भी सुविधा न देने का मामला सामने आया है। पीड़ित किसान दर-दर भटकने को मजबूर है, जबकि जिम्मेदार विभागों पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं।
डलमऊ तहसील क्षेत्र के पखरामऊ गांव निवासी सुशील अग्निहोत्री ने आरोप लगाया है कि उन्होंने लघु सिंचाई के तहत बोरिंग कराई और बिजली कनेक्शन के लिए सभी आवश्यक प्रक्रिया पूरी की। इसके बावजूद महीनों बीत जाने के बाद भी उनका कनेक्शन नहीं किया गया। किसान का कहना है कि फरवरी से बिजली का सामान पड़ा हुआ है, लेकिन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कमीशनखोरी के चक्कर में काम करने को तैयार नहीं हैं।

पीड़ित के मुताबिक, बिजली विभाग के जेई और एक्सईएन स्तर के कर्मचारियों द्वारा लगातार पैसे की मांग की जा रही है। “त्रिपुला पावर हाउस गया तो वहां भी ₹16,000 की मांग की गई। बिना पैसे दिए कोई काम नहीं हो रहा,” किसान ने आरोप लगाते हुए कहा।
सुशील अग्निहोत्री का दावा है कि वह अब तक बिजली विभाग को करीब ₹2,34,000 डीडी के माध्यम से दे चुके हैं, जबकि बोरिंग के लिए ब्लॉक स्तर पर ₹1,22,000 अलग से जमा कराया गया। इसके बावजूद न तो कनेक्शन मिला और न ही सिंचाई की व्यवस्था शुरू हो सकी।
पीड़ित ने आरोप लगाते हुए कहा कि अधिशासी अभियंता मुकेश दुबे, कर्मचारी हिमांशु सिंह और जल निगम के जेई अरुण शुक्ला सहित कई अधिकारियों ने अवैध वसूली की। “हर दफ्तर में पैसा दो, तब ही फाइल आगे बढ़ती है,” उन्होंने कहा।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि सिंचाई की व्यवस्था न होने के कारण किसान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो रही है। “बोरिंग होने के बाद भी पानी नहीं मिल रहा, जिससे खेत सूख रहे हैं और हमारी मेहनत बर्बाद हो रही है,” पीड़ित ने अपनी पीड़ा जाहिर की।
न्याय की आस में किसान अब जिलाधिकारी से मिलने पहुंचा है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।
बड़ा सवाल: जब सरकार भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा कर रही है, तो आखिर जमीनी स्तर पर यह खुला खेल कब तक चलता रहेगा? क्या पीड़ित किसान को न्याय मिलेगा या फिर फाइलों में ही दबकर रह जाएगा यह मामला?










