Raebareli : उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के लालगंज तहसील अंतर्गत ग्राम नूनैरा में पंचायत भवन से जुड़े भ्रष्टाचार के एक गंभीर मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। एक स्थानीय पीड़ित व्यक्ति ने श्रवण कुमार की तरह अपने कंधे पर दर्जनों प्रार्थना-पत्रों (शिकायती आवेदनों) का बोझ लादकर आज जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर न्याय की जोरदार गुहार लगाई। पीड़ित का आरोप है कि ग्राम पंचायत स्तर पर हुए भ्रष्टाचार की शिकायतें कई महीनों से विभिन्न स्तरों पर की जा रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
पीड़ित ने बताया कि ग्राम नूनैरा के पंचायत भवन निर्माण या इससे जुड़े कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती गई हैं। शिकायती पत्र, साक्ष्य और शपथ-पत्र प्रस्तुत करने के बावजूद जांच में जानबूझकर देरी की जा रही है। उन्होंने पूर्व में जिलाधिकारी (डीएम), मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ), लालगंज के एसडीएम सहित अन्य संबंधित अधिकारियों से बार-बार मिलकर न्याय की मांग की, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब या एक्शन नहीं मिला।

इस घटना में पीड़ित ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रसिद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री जी बार-बार कहते हैं कि भ्रष्टाचार पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन जमीनी स्तर पर यह नीति कागजों तक ही सीमित दिख रही है। यदि जल्द से जल्द दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो मैं मुख्यमंत्री के दरबार तक पदयात्रा करके अपनी पीड़ा पहुंचाऊंगा।”
यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त भ्रष्टाचार की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करता है, जहां आम नागरिक को न्याय के लिए बार-बार दर-दर भटकना पड़ता है। पीड़ित का कहना है कि लाखों रुपये की लागत वाले पंचायत कार्यों में घपले हुए हैं, जिससे ग्रामवासियों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन की सुस्ती से भ्रष्टाचार को बल मिलता है। यदि इस घटना पर त्वरित संज्ञान लिया जाता है और जांच पूरी निष्पक्षता से कराई जाती है, तो यह अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है।
जिलाधिकारी कार्यालय से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों के अनुसार शिकायत पर विचार किया जा रहा है।










