Lpg Crisis India: भारत में इन दिनों LPG (तरल पेट्रोलियम गैस) की भारी किल्लत है। वजह है पश्चिम एशिया में चल रही जंग, खासकर ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच तनाव। भारत अपनी जरूरत का करीब 60% LPG आयात करता है, और ज्यादातर सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरती है। इस रास्ते पर हमलों और ब्लॉकेज की वजह से सप्लाई चेन बाधित हो गई है। मार्च के पहले हफ्ते में LPG की खपत पिछले साल की तुलना में 17.7% कम रही – सिर्फ 1.147 मिलियन टन। फरवरी के मुकाबले तो 26.3% की गिरावट आई। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है, लेकिन कमर्शियल सप्लाई (होटल, रेस्टोरेंट आदि) को काफी कम कर दिया गया, जिससे रसोई में गैस नहीं मिल रही।
सरकार ने रिफाइनरियों को घरेलू सप्लाई बढ़ाने के निर्देश दिए हैं और पाइप्ड गैस नेटवर्क को तेज करने का वादा किया है, लेकिन अभी हालात चिंताजनक हैं।

किचन में बदलाव: गैस नहीं तो रेडी-टू-ईट फूड
जब घर में गैस सिलेंडर खाली हो रहा है या रिफिल नहीं मिल रहा, तो लोग क्या करेंगे? चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है, इसलिए अब रेडी-टू-ईट (RTE) और पैकेज्ड फूड की तरफ रुख किया जा रहा है। ये ऐसे प्रोडक्ट्स हैं जिन्हें बनाने में बहुत कम या बिल्कुल गैस नहीं लगती – बस माइक्रोवेव में गर्म करें या सीधे खा लें।
Amazon India ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में इंस्टेंट नूडल्स, पैकेज्ड मील्स, स्नैक्स और बेवरेज जैसी कैटेगरी में 15% से ज्यादा ग्रोथ देखी गई है। Amazon Now (क्विक कॉमर्स सर्विस) पर RTE और पैकेज्ड फूड की सेल्स महीने-दर-महीने 20% तक बढ़ी है। Amazon ने एक खास ‘Ready to Eat Store’ भी लॉन्च किया है, जहां अलग-अलग ब्रांड्स के RTE प्रोडक्ट्स एक जगह मिल जाते हैं।
शहरों से लेकर छोटे कस्बों में भी फैला ट्रेंड
यह बदलाव सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। दिल्ली-NCR, मुंबई, बेंगलुरु जैसे महानगरों के अलावा हैदराबाद, कोलकाता, चेन्नई और टियर-2/टियर-3 शहर जैसे सोनीपत और पणजी में भी डिमांड तेजी से बढ़ रही है। लोग अब “इंस्टेंट कन्वीनियंस” पर फोकस कर रहे हैं – मतलब जल्दी तैयार होने वाला खाना। साथ ही स्टेपल्स जैसे चावल, तेल, ड्राई फ्रूट्स और बेवरेज भी स्टॉक कर रहे हैं।
क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर डिलीवरी तेज होने से लोग घर बैठे ऑर्डर कर रहे हैं। कई लोग इंडक्शन स्टोव, राइस कुकर जैसे इलेक्ट्रिक अप्लायंसेज भी खरीद रहे हैं, ताकि गैस पर निर्भरता कम हो।
पैकेज्ड फूड कंपनियों पर भी असर
RTE और पैकेज्ड फूड की डिमांड बढ़ रही है, लेकिन प्रोडक्शन साइड पर चुनौतियां हैं। कई पैकेज्ड फूड कंपनियां LPG की कमी से प्रभावित हैं और प्रोडक्शन कम कर रही हैं। कुछ अल्टरनेटिव फ्यूल जैसे PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) या इलेक्ट्रिक हीटिंग की तरफ जा रही हैं, लेकिन ये महंगे हैं। फिर भी कंज्यूमर साइड पर RTE प्रोडक्ट्स जैसे बिरयानी किट्स, राइस मिक्स, फ्रोजन स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स की बिक्री 10-20% तक बढ़ी है।
Amazon के स्पोक्सपर्सन ने कहा, “पिछले कुछ हफ्तों में रेडी-टू-कंज्यूम मील सॉल्यूशंस की डिमांड लगातार बढ़ रही है, जो बहुत कम समय में तैयार हो जाते हैं।”
भविष्य में क्या होगा? आदतें बदल सकती हैं
अगर LPG का संकट लंबा चला तो यह बदलाव स्थायी हो सकता है। लोग RTE फूड को ज्यादा इस्तेमाल करने लगेंगे, जिससे ई-कॉमर्स और पैकेज्ड फूड मार्केट में ग्रोथ आएगी। लेकिन साथ ही हेल्थ एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि इससे खाने की आदतें बदल सकती हैं – कुछ लोग हेल्दी होम-कुक्ड फूड की तरफ लौट सकते हैं, जबकि कई RTE पर निर्भर हो जाएंगे।










