पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) एक बार फिर अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा में हैं। राज्य में चुनावी माहौल और लगातार बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों के बीच लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर ममता बनर्जी को पहले कौन सी सुरक्षा मिली हुई थी और अब उनके पास किस तरह का सुरक्षा कवर है।
देश में बड़े नेताओं की सुरक्षा का जिम्मा अलग-अलग एजेंसियों के पास होता है। यह सुरक्षा उनके खतरे के स्तर के हिसाब से तय की जाती है। ममता बनर्जी देश की प्रमुख राजनीतिक नेताओं में शामिल हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा व्यवस्था हमेशा अहम मानी जाती रही है।

पहले ममता बनर्जी को मिली थी Z+ सिक्योरिटी
ममता बनर्जी को पहले केंद्र सरकार की तरफ से Z+ श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी। यह देश में मिलने वाली सबसे मजबूत सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। इस सुरक्षा में एनएसजी (NSG), सीआरपीएफ (CRPF) और राज्य पुलिस के जवान शामिल रहते हैं।
Z+ सुरक्षा के तहत किसी वीआईपी के साथ करीब 50 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं। इनमें कमांडो, एस्कॉर्ट वाहन, पायलट गाड़ी और आधुनिक हथियारों से लैस जवान शामिल होते हैं। मुख्यमंत्री होने के कारण राज्य पुलिस की सुरक्षा भी उनके साथ रहती है।
ममता बनर्जी पर पहले भी कई बार हमले या सुरक्षा में चूक के आरोप लग चुके हैं। चुनाव प्रचार के दौरान भीड़ में धक्का लगने और चोट लगने की घटनाएं भी सामने आई थीं। इसके बाद उनकी सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच बहस भी हुई थी।
अब उनके पास क्या सुरक्षा व्यवस्था है?
हाल की रिपोर्ट्स के मुताबिक ममता बनर्जी के पास अब भी हाई लेवल सिक्योरिटी कवर मौजूद है। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था में समय-समय पर बदलाव होते रहते हैं। खतरे के आकलन के आधार पर केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियां तय करती हैं कि किस नेता को किस स्तर की सुरक्षा दी जाए।
फिलहाल उनकी सुरक्षा में केंद्रीय बलों के साथ पश्चिम बंगाल पुलिस की विशेष टीम भी तैनात रहती है। उनके घर, यात्रा और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं। मुख्यमंत्री होने के कारण राज्य प्रशासन भी उनकी सुरक्षा पर खास नजर रखता है।
कैसे तय होती है नेताओं की सुरक्षा?
भारत में नेताओं और वीआईपी की सुरक्षा “थ्रेट परसेप्शन” यानी खतरे के आकलन के आधार पर तय होती है। यह काम खुफिया एजेंसियां करती हैं। किसी नेता को खतरा ज्यादा होने पर उसकी सुरक्षा बढ़ा दी जाती है।
देश में आमतौर पर X, Y, Y+ और Z+ जैसी सुरक्षा श्रेणियां होती हैं। इनमें सबसे मजबूत सुरक्षा Z+ मानी जाती है। इसमें बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। प्रधानमंत्री को मिलने वाली एसपीजी सुरक्षा इससे अलग और सबसे खास मानी जाती है।
बंगाल चुनावों में सुरक्षा बड़ा मुद्दा
पश्चिम बंगाल में चुनावों के दौरान सुरक्षा हमेशा बड़ा राजनीतिक मुद्दा रही है। राज्य में कई बार हिंसा और राजनीतिक टकराव की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर भी लगातार चर्चा होती रहती है।
बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच कई बार सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आरोप-प्रत्यारोप भी हुए हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों ही सुरक्षा को लेकर अपनी-अपनी दलीलें देती रही हैं।
सादगी भरी छवि के लिए भी मशहूर हैं ममता
ममता बनर्जी अपनी सादगी भरी जीवनशैली के लिए भी जानी जाती हैं। अक्सर उन्हें साधारण चप्पल और सफेद सूती साड़ी में देखा जाता है। भारी सुरक्षा के बावजूद वे कई बार सीधे लोगों के बीच पहुंच जाती हैं। यही वजह है कि उनकी सुरक्षा एजेंसियों के लिए भीड़ को नियंत्रित करना चुनौती बन जाता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ममता बनर्जी की लोकप्रियता और उनका जनता से सीधा जुड़ाव ही उनकी राजनीति की सबसे बड़ी ताकत है। हालांकि इसी वजह से उनकी सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता भी बरती जाती है।
चुनावों के दौरान बढ़ सकती है सुरक्षा
आने वाले चुनावों और राजनीतिक कार्यक्रमों को देखते हुए ममता बनर्जी की सुरक्षा में आगे और बदलाव किए जा सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियां लगातार उनके कार्यक्रमों और खतरे के स्तर की समीक्षा करती रहती हैं।










