Rewa Police: रीवा जिला, जो मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में स्थित है, इन दिनों लगातार आपराधिक घटनाओं और पुलिस की कार्यशैली को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है। आम लोग अब खुलकर सवाल पूछ रहे हैं कि क्या यहाँ कानून-व्यवस्था ठीक से चल रही है या सिर्फ वीडियो वायरल होने के बाद ही कार्रवाई होती है? हाल ही में दो बड़ी घटनाएँ सामने आई हैं, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे हैं। पहली घटना कलश यात्रा के दौरान हर्ष फायरिंग की, जिसमें एक वीडियोग्राफर के पैर में गोली लग गई। दूसरी घटना एक साधु जैसी वेशभूषा वाले व्यक्ति द्वारा खुलेआम फायरिंग की, जो अब वायरल हो रही है। इन दोनों मामलों में सीएसपी राजीव पाठक की टीम पर सवाल उठ रहे हैं कि घटना के तीन दिन बाद वीडियो कैसे वायरल होता है और असली कार्रवाई कब होगी?
कलश यात्रा में हर्ष फायरिंग
कुछ दिन पहले रीवा के समान थाना क्षेत्र में चैत्र नवरात्रि के मौके पर एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई थी। यात्रा गुलाब नगर के पास पहुँची तो अचानक हर्ष फायरिंग शुरू हो गई। भीड़ में मौजूद लोग खुशी मना रहे थे, लेकिन एक व्यक्ति ने हथियार निकालकर आसमान की ओर गोलियाँ चलानी शुरू कर दीं। इसी दौरान फायरिंग से एक वीडियोग्राफर/फोटोग्राफर पवन सेन के पैर में गोली लग गई। वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना की तस्वीरें और वीडियो फौरन नहीं आए, लेकिन अब तीन दिन बाद पूरा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे एक युवक हथियार लहराता हुआ फायरिंग कर रहा है। लोग हैरान हैं कि इतनी बड़ी घटना हुई, एक निर्दोष व्यक्ति घायल हुआ, फिर भी वीडियो इतने दिनों बाद क्यों सामने आया? क्या पुलिस ने घटना के समय वीडियो जब्त नहीं किया था? या फिर यह वीडियो किसी और ने रिकॉर्ड किया था जो अब वायरल कर रहा है? सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि पुलिस को आरोपी की पहचान आसानी से हो सकती थी, क्योंकि चेहरा साफ दिख रहा है। फिर भी शुरुआत में FIR अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई। अब सवाल यह है कि क्या पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया या अभी भी तलाश जारी है?
साधु जैसी वेशभूषा में खुलेआम फायरिंग
इसी बीच एक और चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है। इसमें एक व्यक्ति साधु जैसी पोशाक में, भीड़ के बीच खुलेआम बंदूक लहराता हुआ दिख रहा है। वह आसमान की ओर गोलियाँ चला रहा है, जबकि लोग इधर-उधर भाग रहे हैं। वीडियो की क्वालिटी अच्छी है और व्यक्ति का चेहरा भी साफ नजर आ रहा है। यह वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह घटना भी समान थाना क्षेत्र की है? या रीवा जिले में ऐसी घटनाएँ अब आम हो गई हैं?
कुछ लोग कह रहे हैं कि यह साधु जैसा व्यक्ति किसी रसूखदार का बाउंसर या साथी हो सकता है, क्योंकि इतने खुले में फायरिंग करने की हिम्मत आम आदमी में नहीं होती। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बाउंसर ने ही गन लोड करके दी थी। लेकिन पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सोशल मीडिया पर लोग टिप्पणियाँ कर रहे हैं – कुछ कह रहे हैं कि यह पुलिस की कार्रवाई का हिस्सा है, यानी वीडियो वायरल करके दबाव बनाया जा रहा है। वहीं दूसरे इसे पुलिस की नाकामी बता रहे हैं कि ऐसी घटनाएँ रोकने में नाकाम रहती है और बाद में वीडियो के सहारे बहाना बनाती है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
रीवा में सीएसपी राजीव पाठक के नेतृत्व वाली पुलिस टीम पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि जब कोई घटना होती है तो पुलिस पहले कार्रवाई क्यों नहीं करती? क्यों आरोपी को तुरंत पकड़ा नहीं जाता? और जब वीडियो वायरल हो जाता है तो अचानक जांच तेज हो जाती है। क्या यह तरीका सही है? या पुलिस सिर्फ सोशल मीडिया के दबाव में काम करती है?
आमजन का मानना है कि कानून-व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए। हर्ष फायरिंग जैसी घटनाएँ धार्मिक आयोजनों में भी हो रही हैं, जो बहुत खतरनाक है। निर्दोष लोग घायल हो रहे हैं। अगर पुलिस समय पर एक्शन लेती तो शायद ये वीडियो वायरल होने की नौबत न आती। लेकिन अब दोनों मामलों में पारदर्शिता की जरूरत है। लोगों को जानना चाहिए कि आरोपी कौन हैं, उन्हें कब गिरफ्तार किया गया और क्या कार्रवाई हुई।
निष्कर्ष
रीवा जिले में ये घटनाएँ लगातार हो रही हैं। पहले हर्ष फायरिंग का मामला, अब साधु वाली फायरिंग। दोनों में वीडियो वायरल हैं, लेकिन असली कार्रवाई का इंतजार है। आला अधिकारी अगर पारदर्शी तरीके से काम करेंगे तो लोगों का भरोसा बढ़ेगा। वरना ‘वायरल वीडियो’ ही कार्रवाई का एकमात्र माध्यम बनता रहेगा।










