Kayamganj: कायमगंज में राष्ट्रीय प्रगतिशील फोरम द्वारा शहीदों के बलिदान दिवस पर एक संगोष्ठी का आयोजन कृष्णा प्रेस परिसर में किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए और देश के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को देशभक्ति और बलिदान की भावना से जोड़ना था।
वक्ताओं ने 23 मार्च 1931 के उस ऐतिहासिक दिन को याद किया, जब भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी दी थी। इस घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश की लहर दौड़ गई थी और स्वतंत्रता आंदोलन को नई गति मिली थी।

क्रांति के बिना नहीं मिलती आजादी
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर रामबाबू मिश्र ने कहा कि देश की आजादी केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए त्याग और बलिदान जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि जब क्रांति के मार्ग पर चलने वाले वीर अपने प्राणों की बाजी लगाते हैं, तभी देश स्वतंत्र होता है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शहीदों के जीवन से प्रेरणा लें और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें। उनका कहना था कि आज के समय में भी देशभक्ति और नैतिक मूल्यों की उतनी ही आवश्यकता है जितनी स्वतंत्रता संग्राम के समय थी।
भगत सिंह के विचार आज भी प्रासंगिक हैं
प्रोफेसर मिश्र ने बताया कि भगत सिंह केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि एक गहरे चिंतक भी थे। उन्होंने विश्व के क्रांतिकारी इतिहास का अध्ययन किया था। वे वीर सावरकर के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, गीता के कर्मयोग और ‘आनंदमठ’ की क्रांतिकारी विचारधारा से प्रभावित थे।
उन्होंने कहा कि भगत सिंह के विचार आज भी युवाओं को सही दिशा दिखाने का काम करते हैं और समाज में जागरूकता लाने की प्रेरणा देते हैं।
देशभक्ति गीतों से गूंजा वातावरण
कार्यक्रम में गीतकार पवन बाथम ने देशभक्ति से भरपूर गीत प्रस्तुत किया, जिससे पूरा माहौल भावुक और जोश से भर गया। उन्होंने गाया—
“आजादी से नहीं बड़े हैं मजहब और धरम,
आओ मिलकर गाएं वंदे मातरम।”
इस गीत ने लोगों के दिलों में राष्ट्रप्रेम की भावना को और मजबूत कर दिया और सभी ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।
बलिदानी वीरों को भूलना घातक
आचार्य शिवकांत शुक्ला और अहिवरन सिंह गौर ने कहा कि अगर समाज अपने बलिदानी वीरों को भूल जाता है, तो उसका नैतिक पतन हो जाता है। उन्होंने कहा कि शहीदों के आदर्शों को अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों और युवाओं को इन महान क्रांतिकारियों की कहानियां सुनानी चाहिए, ताकि उनमें देशभक्ति की भावना विकसित हो सके।
क्रांतिकारियों के हाथ में सत्ता होती तो देश और आगे बढ़ता
वीएस तिवारी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि यदि देश की सत्ता क्रांतिकारियों के हाथ में होती, तो भारत और भी महान बन सकता था। उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों में देश के लिए समर्पण और दूरदर्शिता दोनों थे।
कविताओं के जरिए दी गई प्रेरणा
संगोष्ठी में युवा कवियों ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि दी। कवि अनुपम मिश्रा ने कहा
“अगर सफल हो जाती भारत की वह क्रांति,
बच जाता शुभ आचरण, मिट जाती सब भ्रांति।”
वहीं छात्र कवि यशवर्धन ने अपनी पंक्तियों में कहा—
“अगर चाहते देश का रक्षित रहे चरित्र,
क्रांतिकारियों के रखो हर मंदिर में चित्र।”
इन कविताओं ने सभी को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया।
अंत में लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर जेपी दुबे, शिवकुमार दुबे, अंजना शुक्ला, कीर्ति दुबे, मंजू मिश्रा सहित कई लोग उपस्थित रहे।










