रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड के कोयलांचल क्षेत्र में हाल ही में एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। यहां की महिलाओं ने समाज को नशा मुक्त बनाने का बीड़ा उठाया और इसके लिए एक बड़े स्तर पर पैदल जनजागरण अभियान चलाया। इस अभियान का नेतृत्व “सम्पूर्ण महिला समिति, गोसी” ने किया, जिसमें सैकड़ों महिलाएं, बच्चे और ग्रामीण उत्साह के साथ शामिल हुए।
इस अभियान की शुरुआत गोसी बस्ती से हुई, जहां से महिलाएं समूह बनाकर आस-पास के कई गांवों की ओर निकलीं। उनका उद्देश्य सिर्फ नारे लगाना नहीं था, बल्कि हर घर तक पहुंचकर लोगों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में समझाना और उन्हें इस बुरी आदत से दूर रहने के लिए प्रेरित करना था।

गांव-गांव तक पहुंचा जागरूकता का संदेश
यह अभियान गोसी से शुरू होकर लईयो, तितिरमरवा, चाकडीह, केदला, नवाडीह, बसंतपुर और दुनी जैसे कई गांवों तक पहुंचा। रास्ते में जहां-जहां भी लोग मिले, वहां महिलाओं ने रुककर उनसे बातचीत की और नशे से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से बताया।
महिलाओं ने लोगों को समझाया कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करता है। इससे घर की आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है, बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ता है और परिवार में झगड़े बढ़ जाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने परिवार और बच्चों के भविष्य के लिए नशा छोड़ दें।
तेज धूप में भी नहीं टूटा हौसला
इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि भीषण गर्मी और तेज धूप के बावजूद महिलाओं का उत्साह कम नहीं हुआ। वे पूरे जोश और ऊर्जा के साथ कई किलोमीटर तक पैदल चलीं। उनके साथ छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल थे, जो इस मुहिम का हिस्सा बनकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश दे रहे थे।
यह दृश्य देखने लायक था—एक ओर महिलाएं हाथों में बैनर और तख्तियां लिए नारे लगा रही थीं, तो दूसरी ओर बच्चे भी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे। यह एकता और जागरूकता का बेहतरीन उदाहरण था।
गीतों के जरिए दिया प्रभावशाली संदेश
अभियान को और भी असरदार बनाने के लिए झारखंडी खोरठा गायक एवं कलाकार मजबूल खान भी इसमें शामिल हुए। उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों को सरल और भावनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया।
उनके गीतों में यह बताया गया कि कैसे नशा इंसान की जिंदगी को बर्बाद कर देता है और परिवार को टूटने पर मजबूर कर देता है। ग्रामीणों ने इन गीतों को ध्यान से सुना और कई लोग भावुक भी हो गए। इस तरह गीतों ने लोगों के दिलों तक सीधे पहुंचकर गहरा प्रभाव छोड़ा।
नशा: एक सामाजिक बुराई
स्थानीय बुद्धिजीवियों और जागरूक लोगों का मानना है कि नशा आज समाज के लिए एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। यह एक ऐसी आदत है जो धीरे-धीरे इंसान को अंदर से खत्म कर देती है।
नशे की वजह से न केवल स्वास्थ्य खराब होता है, बल्कि व्यक्ति की सोच और व्यवहार भी बदल जाता है। कई बार लोग अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारियां भी भूल जाते हैं, जिससे रिश्तों में दरार आ जाती है। ऐसे में समाज को जागरूक करना बहुत जरूरी हो जाता है।
गूंजे प्रेरणादायक नारे
अभियान के दौरान महिलाओं और बच्चों ने कई प्रेरणादायक नारे लगाए, जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहे थे। जैसे—
- “नशे की लत एक बीमारी है, इससे दूर रहना समझदारी है”
- “नशा नहीं, शिक्षा को अपनाओ – देश को नई राह दिखाओ”
ये नारे केवल शब्द नहीं थे, बल्कि समाज में बदलाव लाने का एक मजबूत संदेश थे। इन नारों को सुनकर कई लोग रुक गए और अभियान के बारे में जानने की कोशिश करने लगे।
सामूहिक प्रयास से संभव हुआ बदलाव
इस पूरे अभियान की सफलता का श्रेय सम्पूर्ण महिला समिति, गोसी के साथ-साथ क्षेत्र के जागरूक नागरिकों, बुद्धिजीवियों और ग्रामीणों को जाता है। सभी ने मिलकर यह दिखा दिया कि जब समाज एकजुट होता है, तो किसी भी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
महिलाओं की यह पहल न सिर्फ उनके साहस को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो बदलाव जरूर संभव है। यह अभियान अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है।
निष्कर्ष
रामगढ़ के कोयलांचल में चलाया गया यह नशा मुक्ति अभियान एक मिसाल है कि कैसे आम लोग मिलकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। महिलाओं का यह प्रयास सराहनीय है और यह उम्मीद जगाता है कि आने वाले समय में और भी लोग इस मुहिम से जुड़ेंगे।










