उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर हुए ताज़ा तबादलों में रायबरेली के सदर तहसील में तैनात एसडीएम और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रफुल्ल कुमार शर्मा का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। शासन ने उन्हें अब राजधानी लखनऊ का मुख्य विकास अधिकारी (CDO) नियुक्त किया है। यह आदेश रविवार, 3 मई 2026 की रात करीब 10 बजे जारी की गई सूची में शामिल था।
रायबरेली में रहा सख्त और चर्चित कार्यकाल
प्रफुल्ल कुमार शर्मा का रायबरेली में लगभग ढाई साल का कार्यकाल काफी प्रभावशाली और चर्चा में रहने वाला रहा। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अवैध प्लाटिंग, अतिक्रमण और सरकारी जमीनों पर कब्जों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया। कई जगहों पर बुलडोजर कार्रवाई भी की गई, जिससे अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया।

हालांकि, इस दौरान उन्हें कुछ मामलों में कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी कार्यशैली में किसी तरह की ढील देखने को नहीं मिली। वे अपने फैसलों पर डटे रहे और कानून के अनुसार कार्रवाई करते रहे।
ईमानदार और अनुशासनप्रिय अधिकारी की छवि
रायबरेली में उनकी पहचान एक सख्त, ईमानदार और नियमों का पालन करवाने वाले अधिकारी के रूप में बनी। उनके कार्यकाल में तहसील स्तर पर भ्रष्टाचार पर काफी हद तक नियंत्रण देखने को मिला। कर्मचारियों के बीच अनुशासन बना रहा और बिना नियमों के काम करवाना आसान नहीं रहा।
आम लोगों के बीच भी उनकी छवि एक ऐसे अधिकारी की बनी, जो बिना दबाव के काम करता है और नियमों को प्राथमिकता देता है। यही वजह है कि उनके काम की सराहना भी हुई और कई लोग उनके समर्थन में भी नजर आए।
तबादले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
उनके तबादले की खबर सामने आने के बाद रायबरेली में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां आम जनता और उनके समर्थकों में कुछ हद तक निराशा देखी गई, वहीं कुछ कर्मचारियों ने राहत की सांस भी ली।
कई लोगों का मानना है कि उनकी सख्ती के कारण व्यवस्था बेहतर हुई थी, जबकि कुछ लोग उनकी कार्यशैली को बहुत कड़ा मानते थे। ऐसे में उनका स्थानांतरण चर्चा का विषय बना हुआ है।
लखनऊ में नई चुनौती
अब प्रफुल्ल कुमार शर्मा के सामने लखनऊ में एक नई और बड़ी जिम्मेदारी है। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के रूप में उन्हें विकास कार्यों को गति देनी होगी, सरकारी योजनाओं का सही और पारदर्शी तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा।
राजधानी होने के कारण लखनऊ में काम का दायरा और जिम्मेदारी दोनों ही ज्यादा होते हैं। ऐसे में उनके अनुभव और सख्त कार्यशैली से उम्मीद की जा रही है कि वे यहां भी प्रभावी तरीके से काम करेंगे।
अब सबकी नजर नए अधिकारी पर
रायबरेली में उनके स्थानांतरण के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी जगह आने वाला नया अधिकारी किस तरह से काम करता है। क्या वह भी उसी सख्ती और अनुशासन के साथ कार्य करेगा या फिर कार्यशैली में बदलाव देखने को मिलेगा—यह आने वाले समय में साफ हो जाएगा।










