भारत के कई बड़े शहरों में वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर तक पहुंच रहा है। दिल्ली-NCR, मुंबई, कोलकाता और लखनऊ जैसे शहरों में खराब हवा लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाल रही है। डॉक्टरों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में अस्थमा के मरीज तेजी से बढ़े हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह खराब हवा मानी जा रही है।
अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जिसमें सांस लेने में दिक्कत होती है। मरीज को खांसी, सीने में जकड़न, घरघराहट और सांस फूलने जैसी समस्याएं होती हैं। पहले यह बीमारी सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन अब बच्चे और युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।

कैसे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है गंदी हवा?
विशेषज्ञों के मुताबिक हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे छोटे प्रदूषक कण सीधे फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। ये कण इतने छोटे होते हैं कि शरीर इन्हें आसानी से बाहर नहीं निकाल पाता। धीरे-धीरे ये फेफड़ों में सूजन पैदा करते हैं और सांस की नलियों को संकरा बना देते हैं।
जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहता है, तो उसकी सांस लेने की क्षमता कमजोर होने लगती है। यही कारण है कि कई लोगों को सुबह या रात में ज्यादा खांसी और सांस फूलने की शिकायत होती है।
डॉक्टरों का कहना है कि जिन लोगों को पहले से अस्थमा है, उनके लिए प्रदूषण और ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। खराब हवा अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ा देती है।
बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते, इसलिए प्रदूषण का असर उन पर ज्यादा होता है। कई रिसर्च में सामने आया है कि खराब हवा बच्चों के फेफड़ों की ग्रोथ को प्रभावित कर सकती है।
स्कूल जाने वाले बच्चों में लगातार खांसी, एलर्जी और सांस की दिक्कत के मामले बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर बचपन में लंबे समय तक प्रदूषण का असर रहे, तो आगे चलकर गंभीर सांस की बीमारी हो सकती है।
घर के अंदर की हवा भी हो सकती है खतरनाक
अक्सर लोग सोचते हैं कि सिर्फ बाहर की हवा ही खराब होती है, लेकिन घर के अंदर का प्रदूषण भी अस्थमा बढ़ा सकता है। रसोई का धुआं, अगरबत्ती, सिगरेट का धुआं, धूल और खराब वेंटिलेशन भी सांस की बीमारी बढ़ाने का कारण बन सकते हैं।
ग्रामीण इलाकों में लकड़ी और कोयले से खाना बनाने वाले घरों में महिलाओं और बच्चों में अस्थमा का खतरा ज्यादा पाया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि घर के अंदर की जहरीली हवा भी उतनी ही नुकसानदायक हो सकती है जितनी बाहर की।
किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?
डॉक्टरों के मुताबिक कुछ लोगों को प्रदूषण से ज्यादा खतरा होता है। इनमें शामिल हैं:
- बच्चे और बुजुर्ग
- पहले से अस्थमा या एलर्जी के मरीज
- दिल और फेफड़ों की बीमारी वाले लोग
- ट्रैफिक और धूल वाले इलाकों में काम करने वाले लोग
- धूम्रपान करने वाले लोग
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार खराब हवा में रहने से फेफड़ों की क्षमता कम हो सकती है और आगे चलकर COPD जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
पल्मोनोलॉजिस्ट यानी फेफड़ों के डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण सीधे तौर पर अस्थमा को ट्रिगर करता है। कई अस्पतालों में खराब AQI वाले दिनों में सांस के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक कई लोग शुरुआत में लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर लगातार खांसी, सांस फूलना या सीने में भारीपन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
घर से निकलने से पहले करें ये काम?
अगर आपके शहर का AQI खराब है, तो कुछ सावधानियां जरूरी हैं:
- सुबह जल्दी और देर रात बाहर निकलने से बचें
- मास्क पहनकर ही बाहर जाएं
- ज्यादा ट्रैफिक और धूल वाली जगहों से दूर रहें
- घर में एयर प्यूरीफायर या साफ हवा का इंतजाम करें
- बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा देर बाहर न रखें
- भरपूर पानी पिएं और पौष्टिक खाना खाएं
विशेषज्ञों का कहना है कि N95 मास्क प्रदूषण से कुछ हद तक बचाव कर सकता है। हालांकि सिर्फ मास्क पहनने से पूरी सुरक्षा नहीं मिलती।
क्या सिर्फ सर्दियों में बढ़ती है समस्या?
अक्सर सर्दियों में प्रदूषण ज्यादा दिखाई देता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों और बरसात के बाद भी खराब हवा लोगों को नुकसान पहुंचा सकती है। कई शहरों में पूरे साल AQI सुरक्षित स्तर से ऊपर रहता है।
इसलिए सिर्फ मौसम बदलने का इंतजार करना काफी नहीं है। लोगों को रोजाना अपने आसपास की हवा की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए।
सरकार और लोगों दोनों की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ दवा से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए प्रदूषण कम करना सबसे जरूरी है। वाहनों का धुआं, फैक्ट्रियों का प्रदूषण, कूड़ा जलाना और निर्माण कार्य खराब हवा की बड़ी वजह हैं।
सरकार लगातार कई योजनाएं चला रही है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि लोगों को भी जागरूक होना होगा। पेड़ लगाना, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल और प्रदूषण फैलाने वाली चीजों से बचना जरूरी है।
नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
डॉक्टरों का कहना है कि खराब हवा का असर धीरे-धीरे दिखाई देता है। शुरुआत में सिर्फ हल्की खांसी या एलर्जी महसूस होती है, लेकिन लंबे समय तक प्रदूषण में रहने से फेफड़ों को स्थायी नुकसान हो सकता है।
यही वजह है कि विशेषज्ञ बार-बार लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। अगर समय रहते सावधानी बरती जाए, तो अस्थमा और दूसरी सांस की बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।










