दिल्ली में चलती बस में दो घंटे की दरिंदगी: सिर्फ समय पूछा था, तो हो गई गैंगरेप की वारदात

एक मां की जिंदगी तबाह, निर्भया जैसी घटना ने फिर दहला दिया दिल्ली को

Delhi Rape Case: दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा पर एक बार फिर सवालिया निशान लग गया है। सोमवार देर रात की यह घटना इंसानियत को शर्मसार करने वाली है। 30 साल की एक गरीब महिला, जो काम करके घर लौट रही थी, सिर्फ समय पूछने के बहाने चलती प्राइवेट बस में खींच ली गई। बस में दो दरिंदों ने करीब दो घंटे तक उसके साथ बलात्कार किया। फिर उसे सड़क पर फेंक दिया गया। यह घटना रानी बाग से नांगलोई तक चलती रही। पीड़िता ने पुलिस को अपनी दर्दनाक कहानी बताई है।

पीड़िता कौन है और क्या हुआ था?

पीड़िता पितमपुरा के झुग्गी-झोपड़ी इलाके में रहती है। उसके पति टीबी से बीमार हैं और तीन छोटी-छोटी बेटियां हैं। वह मंगोलपुरी में एक फैक्ट्री में काम करती है। रोज की तरह वह काम से थक-हार कर घर लौट रही थी। रानी बाग इलाके में सरस्वती विहार बस स्टैंड के पास वह खड़ी थी।

रात का समय था। बस रुकती है और वह बस के दरवाजे पर खड़े एक आदमी से सिर्फ इतना पूछ लेती है – “भैया, कितने बजे हैं?” इसी साधारण सवाल का इतना भयानक अंजाम होगा, यह किसी को सपने में भी नहीं सोचा होगा। बस का ड्राइवर और कंडक्टर दोनों मिले हुए थे। उन्होंने महिला को जबरन बस में खींच लिया।

बस चल पड़ी। रानी बाग के इलाके में घूमती रही। अंदर क्या हो रहा था, बाहर किसी को पता नहीं चलता था क्योंकि यह स्लीपर बस थी। लगभग 7 किलोमीटर तक बस घूमती रही। इस दौरान दोनों आरोपीयों ने पीड़िता के साथ बारी-बारी से दरिंदगी की। दो घंटे तक यह सिलसिला चलता रहा।

आखिर में नांगलोई इलाके के पास पहुंचकर उन्होंने घायल महिला को सड़क पर फेंक दिया। रात के करीब 2 बजे की बात थी। पीड़िता बुरी तरह घायल थी, लेकिन घर की चिंता उसे सता रही थी। तीन छोटी बेटियां इंतजार कर रही होंगी, बीमार पति को खाना बनाना है। वह अस्पताल जाने को तैयार नहीं हुई। किसी तरह घर पहुंची और फिर परिवार वालों के साथ पुलिस स्टेशन पहुंची।

पुलिस की कार्रवाई

दिल्ली पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज किया। रानी बाग थाने में FIR दर्ज हुई। CCTV फुटेज की मदद से दोनों आरोपियों – बस ड्राइवर और कंडक्टर – को जल्दी ही गिरफ्तार कर लिया गया। बस को जब्त करके फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। मेडिकल जांच में भी बलात्कार की पुष्टि हुई है।

पुलिस के मुताबिक बस बिहार रजिस्टर्ड थी, लेकिन दिल्ली में चल रही थी। दोनों आरोपी अभी पूछताछ में हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

पीड़िता की मजबूरी

यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि गरीबी और मजबूरी की कहानी भी है। पीड़िता ने अस्पताल जाने से मना कर दिया क्योंकि घर में खाना बनाने वाला कोई नहीं था। तीन छोटी बेटियों की मां होने के नाते उसकी चिंता परिवार को लेकर थी। ऐसे में महिला सुरक्षा की बात कितनी खोखली लगती है।

रात में अकेली महिला का काम पर जाना और बस से घर लौटना उसके लिए मजबूरी है। लेकिन शहर की सड़कें उसके लिए कितनी असुरक्षित हैं, यह इस घटना से साफ हो जाता है।

निर्भया याद आ गई

2012 की निर्भया घटना याद आ जाती है। उस समय भी एक चलती बस में युवती के साथ दरिंदगी हुई थी और उसे सड़क पर फेंक दिया गया था। पूरे देश में आंदोलन हुए थे। कानून कड़े किए गए। फास्ट ट्रैक कोर्ट बने। लेकिन 14 साल बाद भी दिल्ली में ऐसी घटनाएं रुक नहीं रही हैं।

लोगों ने इस घटना को निर्भया कांड से जोड़कर देखना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर गुस्सा है। AAP नेता मनीष सिसोदिया समेत कई लोगों ने महिला सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।

पीड़िता का दर्द

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह बस में चढ़ते ही डर गई थी। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। उसने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन दो लोग थे और वह अकेली। दो घंटे की वह यातना उसके जिंदगी भर के लिए जख्म बन गई है।

अब परिवार सहारा बनकर खड़ा है। पुलिस भी केस को गंभीरता से ले रही है। लेकिन पीड़िता की जिंदगी सामान्य कभी नहीं हो पाएगी। तीन बेटियों को पालना, बीमार पति की देखभाल और खुद का घाव संभालना – यह कितना मुश्किल होगा।

निष्कर्ष

दिल्ली राजधानी है, देश की। यहां हर दिन हजारों महिलाएं काम पर जाती हैं। लेकिन जब तक सड़कें सुरक्षित नहीं होंगी, बसें और ड्राइवर सुरक्षित नहीं होंगे, तब तक ऐसी खबरें आती रहेंगी।

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