प्रिया सरोज (Priya Saroj) की कथित AI जनरेटेड तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल करने का मामला अब कानूनी मोड़ ले चुका है। समाजवादी पार्टी की युवा सांसद ने आरोप लगाया है कि उनकी छवि खराब करने और राजनीतिक नुकसान पहुंचाने की नीयत से फर्जी तस्वीरें बनाई गईं और इंटरनेट पर फैलायी गईं। इस मामले में एक BJP नेता समेत दो लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर IT Act और अन्य धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला तेजी से चर्चा में है क्योंकि इसमें AI तकनीक के गलत इस्तेमाल और महिला नेताओं की ऑनलाइन छवि खराब करने का मुद्दा जुड़ गया है।

क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल हुईं, जिनमें दावा किया गया कि वे Priya Saroj की हैं। सांसद का आरोप है कि ये तस्वीरें असली नहीं बल्कि AI तकनीक की मदद से बनाई गईं। उनका कहना है कि तस्वीरों को एडिट कर इस तरह पेश किया गया जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे।
सपा सांसद ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि इस तरह की पोस्ट जानबूझकर वायरल की गईं ताकि लोगों के बीच गलत संदेश जाए और उनकी राजनीतिक छवि खराब हो।
BJP नेता समेत दो लोगों पर आरोप
शिकायत में एक स्थानीय BJP नेता और एक अन्य व्यक्ति का नाम शामिल किया गया है। आरोप है कि दोनों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इन तस्वीरों को शेयर और प्रमोट किया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मामले की जांच साइबर सेल की मदद से की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि तस्वीरें सबसे पहले किसने बनाई और किस अकाउंट से वायरल की गईं।
AI तकनीक के गलत इस्तेमाल पर बढ़ी चिंता
इस घटना के बाद AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गलत इस्तेमाल को लेकर फिर बहस शुरू हो गई है। पिछले कुछ समय में डीपफेक और AI एडिटेड फोटो-वीडियो के मामले तेजी से बढ़े हैं। खासकर महिला नेताओं और सेलिब्रिटीज को निशाना बनाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि AI टूल्स की मदद से अब किसी की भी नकली तस्वीर या वीडियो बनाना पहले से काफी आसान हो गया है। ऐसे में साइबर कानूनों को और मजबूत बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
सपा ने बताया राजनीतिक साजिश
समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इस मामले को राजनीतिक साजिश बताया है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष की महिला नेताओं को बदनाम करने के लिए सोशल media का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सपा नेताओं ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है और बोला है कि महिलाओं के खिलाफ इस तरह की ऑनलाइन हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस क्या कर रही है?
पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद सोशल मीडिया पोस्ट, अकाउंट्स और डिजिटल सबूतों की जांच शुरू कर दी है। साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से AI तस्वीरों की सत्यता और उनके स्रोत का पता लगाया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि अगर आरोप सही पाए गए तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बढ़ रहे हैं डीपफेक और AI फोटो के मामले
देश में पिछले कुछ महीनों में AI से बने फर्जी वीडियो और तस्वीरों के कई मामले सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली ऐसी सामग्री कई बार लोगों की निजी जिंदगी और करियर पर बड़ा असर डालती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को भी सोशल मीडिया पर किसी फोटो या वीडियो को बिना जांचे शेयर करने से बचना चाहिए। साथ ही सरकार और टेक कंपनियों को मिलकर ऐसे कंटेंट पर निगरानी बढ़ानी होगी।










