ग्रीन इंडस्ट्री की दिशा में बढ़ा झारखंड, ICC ने तैयार किया 4-पॉइंट एक्शन प्लान

सतत विकास पर रांची में मंथन, उद्योग और सरकार मिलकर बनाएंगे ‘झारखंड मॉडल’

झारखंड को सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) ने महत्वपूर्ण पहल की है। रांची में आयोजित “ICC इंडस्ट्रियल सस्टेनेबिलिटी एंड रेजिलिएंस कॉन्क्लेव 2026” में सरकार, उद्योग जगत, पर्यावरण विशेषज्ञों और सस्टेनेबिलिटी से जुड़े पेशेवरों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में ESG यानी पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन मानकों को अपनाने, औद्योगिक मजबूती और हरित विकास जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

“झारखंड मॉडल” बनाने की तैयारी

कार्यक्रम में ICC झारखंड स्टेट काउंसिल के चेयरमैन डॉ. अमृतांशु प्रसाद ने कहा कि अब उद्योगों को केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पर्यावरण और समाज के प्रति भी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने घोषणा की कि ICC झारखंड की ओर से “4-पॉइंट कॉल टू एक्शन” तैयार किया जाएगा। इसके जरिए उद्योग, सरकार, वित्तीय संस्थान और समाज मिलकर झारखंड के लिए एक ऐसा विकास मॉडल तैयार करेंगे, जो पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास दोनों को साथ लेकर चलेगा।

उन्होंने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य है और यहां औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन विकास ऐसा होना चाहिए जिससे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहे। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में “झारखंड मॉडल” देश के अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

सस्टेनेबिलिटी अब जरूरत बन चुकी है

सम्मेलन के मुख्य अतिथि झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव तथा झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष अबूबकर सिद्दीकी पी. ने कहा कि आज के समय में सस्टेनेबिलिटी कोई विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि उद्योगों और संस्थानों को पर्यावरण संरक्षण को अपनी कार्यप्रणाली और संस्कृति का हिस्सा बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि अक्सर लोग पर्यावरण संरक्षण के महत्व को तब समझते हैं जब हालात बिगड़ जाते हैं। इसलिए जरूरी है कि समय रहते ही जिम्मेदार कदम उठाए जाएं। उन्होंने उद्योगों से ग्रीन फ्यूल और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को अपनाने की अपील की ताकि प्रदूषण को कम किया जा सके।

ICC की पहल की हुई सराहना

अबूबकर सिद्दीकी ने ICC की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि झारखंड में पहली बार औद्योगिक सस्टेनेबिलिटी और रेजिलिएंस जैसे विषय पर इतने बड़े स्तर पर केंद्रित चर्चा आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम लगातार होते रहने चाहिए ताकि सरकार और उद्योगों के बीच संवाद मजबूत हो सके।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज और उद्योगों की भी इसमें बराबर की भागीदारी होनी चाहिए।

जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौती

विशेष संबोधन देते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं अतिरिक्त PCCF, CAMPA रवि रंजन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि उद्योगों को नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाकर ऐसे मॉडल तैयार करने चाहिए जो उत्पादन बढ़ाने के साथ पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाएं। रवि रंजन ने कहा कि अगर उद्योग और समाज मिलकर काम करें तो झारखंड हरित विकास के क्षेत्र में देश के लिए मिसाल बन सकता है।

टाटा स्टील ने साझा किए सस्टेनेबिलिटी प्रयास

उद्योग जगत की ओर से टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट राजीव मंगल ने कंपनी द्वारा अपनाए जा रहे सस्टेनेबिलिटी उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टाटा स्टील लगातार कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ औद्योगिक प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने पर काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि कंपनी वैकल्पिक ईंधन और आधुनिक तकनीकों के जरिए पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उनके अनुसार आने वाला समय ग्रीन इंडस्ट्री का है और जो कंपनियां अभी से बदलाव नहीं करेंगी, उन्हें भविष्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

SAIL और JSW Steel ने भी रखा पक्ष

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संदीप कर ने कहा कि SAIL भी कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि कंपनी अपने RDCIS प्रोजेक्ट्स के जरिए नई और पर्यावरण-अनुकूल स्टील निर्माण तकनीकों पर शोध कर रही है।

वहीं JSW Steel के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट मयंक शेखर ने “ग्रीन स्टील” की अवधारणा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब उद्योगों को कम-कार्बन उत्पादन प्रणाली की ओर तेजी से बढ़ना होगा। दुनिया भर में पर्यावरण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है और भविष्य में वही कंपनियां आगे बढ़ेंगी जो पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देंगी।

सामूहिक प्रयास से बनेगा मजबूत झारखंड

सम्मेलन के अंत में सभी वक्ताओं और प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई कि झारखंड और देश के सतत विकास के लिए उद्योगों, सरकार, वित्तीय संस्थानों, पर्यावरण विशेषज्ञों और समाज के बीच लगातार सहयोग जरूरी है।

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