फर्रुखाबाद: नगर स्थित मुर्शिदी व मौलाई सरकार हज़रत बाबा जूही शाह के पवित्र आस्ताने पर आयोजित 68वें सालाना उर्स के दूसरे दिन धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत नातिया मुशायरा और विशेष तकरीर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दूर-दराज से पहुंचे उलेमा, सूफी संतों और अकीदतमंदों की बड़ी संख्या ने शिरकत कर बाबा जूही शाह की शिक्षाओं को याद किया। देर रात तक चले इस आयोजन में इबादत, इल्म, सूफी परंपरा और इंसानियत का संदेश गूंजता रहा।
बाद नमाज-ए-ईशा मीलाद शरीफ के आयोजन के पश्चात तकरीर का कार्यक्रम शुरू हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में जौनपुर की बड़ी खानकाह से तशरीफ लाए पीर-ए-तरीकत एवं सज्जादानशीन अल्लामा मौलाना आले रसूल सैयद नौशाद अली साहब ने औलिया-ए-किराम और सूफी संतों की शिक्षाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सूफी संतों ने हमेशा मोहब्बत, भाईचारे, इंसानियत और सेवा का संदेश दिया है। उनके बताए रास्ते पर चलकर समाज में अमन और सद्भाव कायम किया जा सकता है।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि औलिया अल्लाह ने जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर इंसानियत की खिदमत को सबसे बड़ी इबादत माना। आज जरूरत इस बात की है कि नई पीढ़ी सूफी संतों की शिक्षाओं को आत्मसात करे और समाज में प्रेम व सौहार्द का वातावरण बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाए।
कार्यक्रम में मौजूद मुफ्ती नूरुद्दीन मौलाना यासिर कादरी ने हज़रत बाबा जूही शाह की करामातों और उनके जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाबा जूही शाह का जीवन त्याग, सेवा और मानव कल्याण का प्रतीक था। उन्होंने बताया कि बाबा जूही शाह स्वयं भूखे रहकर जरूरतमंदों को भोजन कराना पसंद करते थे। गरीबों और असहाय लोगों की मदद करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। उन्होंने हमेशा शिक्षा प्राप्त करने और समाज की सेवा करने पर बल दिया।
वहीं मौलाना इमामुद्दीन ने अपने वक्तव्य में बाबा जूही शाह के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी पूरी जिंदगी लोगों को सही राह दिखाने और मानवता की सेवा में समर्पित रही। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही समाज को बेहतर दिशा दी जा सकती है।
कार्यक्रम का संचालन हाफिज कारी गुलफराज साहब ने प्रभावशाली अंदाज में किया। उन्होंने अपनी बेहतरीन निजामत से पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया। उर्स के सज्जादानशीन पीर-ए-तरीकत हज़रत मुशीर अहमद कादरी ने सभी मेहमानों, उलेमा और जायरीन का स्वागत करते हुए उर्स की परंपराओं और बाबा जूही शाह की शिक्षाओं को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
इस अवसर पर आयोजित नातिया मुशायरे में शायरों और नातख्वानों ने अपने कलाम पेश कर महफिल को रूहानी रंग में रंग दिया। नबी-ए-करीम की शान में पढ़ी गई नातों और सूफियाना कलाम ने उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया। देर रात तक अकीदतमंद बड़ी तादाद में महफिल का हिस्सा बने रहे।
उर्स के इस आयोजन में जमीर अहमद, धनेश गौड़, सनी बॉथम, मौलाना गुलाब हसन, हाफिज रिफत, तमहीद अहमद, तौहीद अहमद, मुन्नालाल, अमरेश गंगवार, मुकीम जूही, अमीर जूही, नोमान जूही, मोमिन जूही, जुबैर, आसिफ मंसूरी, सलमान, बिलाल सिद्दीकी, लाल मियां, सुहेल खान, फरजान अहमद, सैयद रशीद अली, बहार मियां शायर, हाफिज आजम, हाफिज कुद्दूस, मसूद खान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और गणमान्य लोगों ने सहभागिता की।
उर्स के दौरान पूरे आस्ताने का माहौल आध्यात्मिक रंग में सराबोर रहा। अकीदतमंदों ने दरगाह पर पहुंचकर चादरपोशी की, मुल्क में अमन-चैन, तरक्की और आपसी भाईचारे की दुआएं मांगीं। आयोजकों के अनुसार उर्स के आगामी कार्यक्रमों में भी धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन जारी रहेंगे।










