Rath Yatra: ओडिशा के पवित्र धाम पुरी में आयोजित विश्वप्रसिद्ध भगवान श्रीजगन्नाथ रथ यात्रा केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का भी सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। इसी भावना को साकार करते हुए ओडिशा के बड़बिल क्षेत्र की समाजसेवी एवं रक्तदाता डॉ. संजुक्ता चटर्जी आचार्य ने अपने पूरे परिवार के साथ दो दिनों तक निःशुल्क भोजन सेवा संचालित कर हजारों श्रद्धालुओं की सेवा की। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के लिए यह भोजन स्टॉल किसी राहत से कम नहीं था।
परिवार बना सेवा अभियान की सबसे बड़ी ताकत
इस सेवा अभियान की सबसे खास बात यह रही कि डॉ. संजुक्ता चटर्जी आचार्य अकेली नहीं थीं। उनके परिवार के सभी सदस्यों ने भोजन तैयार करने, वितरण करने और श्रद्धालुओं की व्यवस्था संभालने में सक्रिय भूमिका निभाई। सुबह से देर शाम तक लगातार श्रद्धालुओं को भोजन परोसा गया, ताकि किसी भी जरूरतमंद को भूखा न रहना पड़े।

श्रद्धालुओं ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे भगवान जगन्नाथ की सच्ची सेवा बताया।
देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए राहत बनी भोजन सेवा
हर वर्ष भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी करोड़ों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। लंबी यात्रा, भीड़ और घंटों तक दर्शन की प्रतीक्षा के बीच भोजन की व्यवस्था कई लोगों के लिए चुनौती बन जाती है।
ऐसे समय में डॉ. संजुक्ता चटर्जी आचार्य द्वारा लगाया गया निःशुल्क भोजन स्टॉल हजारों श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत साबित हुआ। लोगों ने भोजन ग्रहण करने के बाद आयोजकों को धन्यवाद देते हुए उनके इस प्रयास को प्रेरणादायी बताया।
वर्षों से निभा रही हैं सेवा का संकल्प
डॉ. संजुक्ता चटर्जी आचार्य सामाजिक कार्यों और रक्तदान अभियान से लंबे समय से जुड़ी हुई हैं। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना उनकी पहचान बन चुका है। रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सेवा करना भी उनके सामाजिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
उनका मानना है कि भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा करना ही सबसे बड़ा पुण्य है। यही सोच उन्हें हर वर्ष इस प्रकार के सेवा कार्यों के लिए प्रेरित करती है।
सेवा को ही मानती हैं सच्ची पूजा
डॉ. संजुक्ता चटर्जी आचार्य का कहना है कि भगवान की पूजा केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है। यदि किसी जरूरतमंद की भूख मिटाई जाए और थके हुए यात्री की मदद की जाए, तो वही सबसे बड़ी आराधना होती है।
उनके अनुसार, श्रद्धालुओं को अपने हाथों से भोजन परोसने का जो आत्मिक संतोष मिलता है, उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि उनका परिवार हर वर्ष इस सेवा अभियान में पूरे समर्पण के साथ भाग लेता है।
लोगों के लिए बनी प्रेरणा
आज जब समाज में व्यक्तिगत व्यस्तताएं बढ़ती जा रही हैं, ऐसे समय में डॉ. संजुक्ता चटर्जी आचार्य और उनके परिवार का यह प्रयास समाज को सकारात्मक संदेश देता है। मानव सेवा, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी की यह भावना निश्चित रूप से दूसरों को भी प्रेरित करती है कि धार्मिक आयोजनों में केवल सहभागी ही नहीं, बल्कि सेवाभावी बनकर भी योगदान दिया जाए।










