गोड्डा में बदली ज़िंदगी की कहानी, इलाज के साथ आजीविका तक पहुंच

सेहत और रोजगार, गोड्डा को मिला आत्मनिर्भरता का डबल इंजन

गोड्डा: गोड्डा के मोतिया गांव में रहने वाली 60 साल की फदमा देवी के लिए आंखों की रोशनी जाना जीवन रुक जाने जैसा था। आर्थिक तंगी के कारण इलाज असंभव लग रहा था। गांव में लगे आंखों के स्वास्थ्य शिविर में जांच के बाद उन्हें मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए रेफर किया गया। 50 हजार रुपए में होने वाला पूरा इलाज मुफ्त में हुआ। आज फदमा देवी फिर से साफ देख सकती हैं। ऐसा ही मामला लोबांधा गांव के 80 साल के प्रसादी यादव का है। बरसों से जोड़ों के दर्द और दूसरी समस्याओं से जूझ रहे थे। दूर सदर अस्पताल जाना उनके लिए बेहद कठिन था। MHCU में नियमित परामर्श और दवाइयों से उनकी स्थिति में सुधार हुआ। आज वे फिर से गांव में सक्रिय जीवन जी पा रहे हैं। ये कहांनियां बताती हैं कि कैसे किसी कंपनी के छोटे से प्रयास से लोगों की जिंदगी में बड़े सुधार आ सकते हैं।

झारखंड के गोड्डा ज़िले में स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार तक आम लोगों की पहुंच लंबे समय तक एक बड़ी चुनौती रही है। ज़िले की 60 फीसदी से अधिक आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करती है। दूर दराज़ गांव, कमज़ोर स्वास्थ्य ढांचा, डॉक्टरों और नर्सों की कमी और अब भी मौजूद अंधविश्वास – इन सबके बीच अगर कोई बीमार हो जाए तो मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ता है। रोजगार के लिए भी लोगों को भारी मशक्कत का सामना करना पड़ता है। ऐसे हालात में गोड्डा थर्मल पावर प्रोजेक्ट क्षेत्र में अदाणी फाउंडेशन और अदाणी पावर गोड्डा की पहल ने ज़मीनी स्तर पर बड़ा बदलाव शुरू किया है।

मोबाइल अस्पताल, गांव गांव तक पहुंचा इलाज

आपने लोगों को इलाज के लिए अस्पताल तक जाते सुना होगा लेकिन अस्पताल को लोगों तक आते कम सुना होगा। ऐसा ही कुछ गोड्डा में हो रहा है। इलाज को अस्पताल तक सीमित रखने के बजाय, अदाणी फाउंडेशन ने अस्पताल को ही गांवों तक पहुंचाने का मॉडल अपनाया है। चार मोबाइल हेल्थ केयर यूनिट्स के ज़रिए गोड्डा और साहिबगंज के कुल 137 गांवों में नियमित चिकित्सा सेवाएं दी जा रही हैं।

साल 2025 26 में इन मोबाइल यूनिट्स के माध्यम से 74,116 मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक रही। इन यूनिट्स में नियमित स्वास्थ्य जांच, मुफ्त दवाइयां और गंभीर मरीजों के लिए 24 घंटे एम्बुलेंस सेवा भी शामिल है। खास बात यह है कि कुछ यूनिट्स सीधे अदाणी फाउंडेशन द्वारा संचालित हैं, जबकि अन्य अनुभवी सामाजिक संस्था हेल्पएज इंडिया के सहयोग से चलाई जा रही हैं। इससे सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच दोनों सुनिश्चित हो सकी हैं।

एक्सपर्ट डॉक्टर भी अब गांवों के करीब

सिर्फ सामान्य इलाज ही नहीं, बल्कि एक्सपर्ट डॉक्टरी सहायता भी अब गोड्डा के ग्रामीण इलाकों तक पहुंच रही है। मोतिया स्थित कम्युनिटी सेंटर में हर महीने और पखवाड़े में विशेषज्ञ डॉक्टरों के शिविर लगाए जाते हैं। स्त्री रोग, बाल रोग, हृदय, आंख और हड्डी रोग जैसे विषयों के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा 108 स्वास्थ्य शिविरों के ज़रिए 2,415 से अधिक मरीजों को परामर्श, मुफ्त दवाइयां और जांच सुविधाएं दी गईं। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की रही, जो ग्रामीण स्वास्थ्य की वास्तविक ज़रूरत को दर्शाती है।

टीबी से जंग: दवा के साथ पोषण भी

टीबी जैसी गंभीर बीमारी सिर्फ दवा से नहीं, पोषण से भी जुड़ी होती है। इसी सोच के साथ अदाणी फाउंडेशन ने ‘निक्षय मित्र’ कार्यक्रम के तहत गोड्डा और पोड़ैयाहाट के 300 टीबी मरीजों को छह महीने तक पोषण किट उपलब्ध कराई। यह वितरण जिला प्रशासन की मौजूदगी में किया गया, जिससे सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ सामाजिक सहभागिता का मजबूत उदाहरण सामने आया। इस पहल ने टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को ज़मीनी मजबूती दी है।

स्वास्थ्य केंद्रों को मिला नया जीवन

इलाज की गुणवत्ता तभी टिकाऊ होती है जब ढांचा मजबूत हो। गोड्डा थर्मल पावर प्रोजेक्ट के कोर एरिया में स्थित चार हेल्थ सब सेंटरों को अपग्रेड किया गया। इसके अलावा 6 स्वास्थ्य केंद्रों को जरूरी चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए गए, जिससे हर साल लगभग 9,000 मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल पा रही हैं।

खेती से आमदनी, घर तक पोषण

सिर्फ सेहत का ख्याल ही नहीं रखा जा रहा, इसके साथ साथ आजीविका को मजबूत करना भी इस मॉडल का अहम हिस्सा है। मशरूम और सब्जी उत्पादन जैसी पहलें गोड्डा के किसानों के लिए एक्सट्रा इनकम का साधन बनी हैं। आठ गांवों के 300 किसानों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण और किट दी गई। इसके परिणामस्वरूप 15,000 किलो से अधिक मशरूम का उत्पादन हुआ। इसका एक बड़ा हिस्सा परिवारों के पोषण में इस्तेमाल हुआ, जबकि बाकी बाज़ार में बेचकर कमाई हुई है। महिलाओं की भागीदारी ने इस पहल को और प्रभावी बनाया। कई महिलाओं ने मशरूम अचार जैसे वैल्यू एडेड उत्पाद बनाकर अतिरिक्त कमाई भी शुरू की।

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सब्जी खेती से बढ़ी मासिक आमदनी

17 गांवों के 700 किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराए गए, जिससे सब्जी उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। कुल मिलाकर 5,500 क्विंटल से अधिक सब्जियों का उत्पादन हुआ, जिसकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई। खास बात यह रही कि किसानों ने खुद की उपज खपत कर खाद्य खर्च में भी बड़ी बचत की, जिससे वास्तविक आय में बढ़ोतरी हुई।

हुनर से आत्मनिर्भरता तक

खेती के साथ साथ कौशल विकास पर भी ज़ोर दिया गया। अदाणी स्किल डेवलपमेंट सेंटर में फिटर, डेटा एंट्री ऑपरेटर, सोलर टेक्नीशियन जैसे कोर्स संचालित किए गए। इसके अलावा 600 से अधिक महिलाओं को सिलाई और टेलरिंग का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे स्वरोज़गार या स्थानीय स्तर पर काम करने में सक्षम हुईं।

विकास का ऐसा मॉडल जो भरोसा जगाता है

गोड्डा में अदाणी फाउंडेशन और अदाणी पावर द्वारा किए गए ये प्रयास यह दिखाते हैं कि जब उद्योग, समाज और सरकार मिलकर काम करते हैं, तो बदलाव सिर्फ कागज़ों तक सीमित नहीं रहता। स्वास्थ्य, पोषण, आजीविका और कौशल-चारों मोर्चों पर की गई यह पहल गोड्डा के हजारों परिवारों के जीवन में स्थायी बदलाव की नींव रख रही है। तीसरे पक्ष के आकलन भी इन प्रयासों की प्रभावशीलता की पुष्टि करते हैं। यह कहानी सिर्फ एक परियोजना की नहीं, बल्कि उस सोच की है जो विकास को ज़मीन तक पहुंचाने में यकीन रखती है।

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