Bokaro Thermal: हिंदी साहित्य परिषद्, वाणी भवन, बोकारो थर्मल की व्हाट्सऐप साहित्यिक सेवा ने बुधवार को अपने पाँच गौरवपूर्ण एवं स्वर्णिम वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर परिषद् के सचिव दीनानाथ शर्मा ने कहा कि पाँच वर्षों की यह यात्रा साहित्य, संस्कृति, ज्ञान और रचनात्मक संवाद के निरंतर विस्तार की यात्रा रही है।
उन्होंने बताया कि परिषद् के संयुक्त सचिव सत्यजीत कुमार सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका से व्हाट्सऐप साहित्यिक सेवा का सफल संचालन एवं निरंतर विस्तार संभव हुआ। श्री शर्मा ने कहा कि किसी भी संस्था की प्रगति का आधार टीम भावना, सामूहिक प्रयास और निःस्वार्थ समर्पण है। परिषद् की पूरी टीम के सतत प्रयासों और नवीन रचनात्मक प्रयोगों ने इस साहित्यिक अभियान को प्रभावशाली बनाया है।

पाँच वर्षों के दौरान परिषद् के व्हाट्सऐप साहित्यिक समूह के माध्यम से हिंदी के प्रख्यात साहित्यकारों, कवियों एवं विचारकों का परिचय तथा उनकी महत्वपूर्ण रचनाओं का सुव्यवस्थित संकलन प्रस्तुत किया गया। विभिन्न पर्व-त्योहारों के सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व की जानकारी भी सदस्यों तक पहुँचाई जाती रही।
राष्ट्रीय पर्वों के अलावा निगम स्थापना दिवस, हिंदी पखवाड़ा और विश्व हिंदी दिवस जैसे अवसरों पर हिंदी के प्रचार-प्रसार एवं गौरव से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।
परिषद् का साहित्यिक पटल केवल साहित्य तक सीमित नहीं रहा। सामान्य ज्ञान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, वित्त, गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान, चिकित्सा, अर्थशास्त्र, इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान, मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र, क्षेत्रीय भाषाओं, समसामयिक घटनाओं तथा खगोलीय अन्वेषण जैसे विषयों पर भी नियमित रूप से लेख एवं आलेख प्रकाशित किए जाते रहे।
समय के साथ परिषद् ने स्वयं को डिजिटल युग के अनुरूप अद्यतन किया। पिछले पाँच वर्षों में संकलित साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं ज्ञानवर्धक सामग्री के कारण परिषद् की व्हाट्सऐप सेवा अब एक लघु ई-पुस्तकालय (ई-लाइब्रेरी) का स्वरूप ग्रहण कर चुकी है। ज्ञातव्य है कि हिंदी साहित्य परिषद् की व्हाट्सऐप साहित्यिक सेवा की शुरुआत 12 अगस्त 2021 को हुई थी।
श्री शर्मा ने इस उपलब्धि का श्रेय परिषद् के सभी सम्मानित सदस्यों, हिंदी-प्रेमी साहित्यकारों, रचनाकारों एवं सहयोगियों को देते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सामूहिक सहयोग और सतत साहित्य-साधना का परिणाम है तथा विश्वास जताया कि साहित्य, संस्कृति, ज्ञान और हिंदी-सेवा की यह यात्रा भविष्य में भी इसी उत्साह एवं रचनात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ती रहेगी।










