Raebareli: हनुमंतपुरम मोहल्ले में 20 साल पुराने हरे-भरे पेड़ों पर चली नगर पालिका की आरी, पीड़ित महिला ने लगाए गंभीर आरोप

Raebareli: रायबरेली मैं आज दिनांक 10 सितंबर 2026 दिन गुरुवार को समय करीब 3:00 बजे कोतवाली नगर क्षेत्र के हनुमंतपुरम मोहल्ले में सड़क और नाली निर्माण के नाम पर करीब 20 वर्षों से लगे हरे-भरे पेड़ों को काटे जाने का मामला सामने आया है। नगर पालिका प्रशासन की कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। पीड़िता मृग्या श्रीवास्तव ने आरोप लगाया है कि विरोध और शिकायतों के बावजूद दर्जनों पेड़ों को काट दिया गया।

मृग्या श्रीवास्तव का कहना है कि पेड़ों को बचाने के लिए उन्होंने जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री समेत कई अधिकारियों के यहां शिकायत की थी। शिकायत के बाद कुछ दिनों तक पेड़ों की कटान का मामला रुका रहा, लेकिन इसके बाद दोबारा कार्रवाई करते हुए पेड़ों को काट दिया गया। महिला के मुताबिक, ये पेड़ वर्षों से मोहल्ले में मौजूद थे और पूरी तरह हरे-भरे थे।

पीड़िता का आरोप है कि पेड़ों को काटे जाने का विरोध करने पर मोहल्ले में विवाद की स्थिति भी पैदा हो गई और मामला मारपीट की नौबत तक पहुंच गया। उनका कहना है कि उन्होंने जिला प्रशासन से पेड़ों को न काटने की गुहार लगाई और अधिकारियों के सामने हाथ-पैर तक जोड़े, लेकिन उनकी शिकायत पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान पर भी उठाए सवाल

महिला ने कहा कि एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर शहर में वर्षों पुराने हरे पेड़ों को काटा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पुराने पेड़ों को बचाने की जरूरत है तो विकास कार्यों के नाम पर उन्हें काटने की अनुमति कैसे दी जा रही है।

मृग्या श्रीवास्तव ने जिम्मेदारों पर मनमानी और दबंगई का आरोप लगाते हुए कहा कि पेड़ों को बचाने के लिए लगातार आवाज उठाने के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वोट की राजनीति के चलते लोगों की नैतिक जिम्मेदारियां कमजोर होती जा रही हैं और पर्यावरण जैसे गंभीर मुद्दे को नजरअंदाज किया जा रहा है।

फिर अधिकारियों के दरवाजे खटखटाएंगी पीड़िता

पीड़िता ने साफ कहा है कि वह पेड़ों की कटान के मामले को लेकर एक बार फिर जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री और अन्य संबंधित अधिकारियों से शिकायत करेंगी। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराकर पेड़ों की कटान के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, मामले ने शहर में विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और पेड़ों की कटान के संबंध में नगर पालिका प्रशासन की ओर से क्या स्पष्टीकरण सामने आता है।

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