Kartik Mining मजदूरों का HPC भुगतान को लेकर अल्टीमेटम, 15 सितंबर तक कार्रवाई नहीं हुई तो ठप होगा काम

प्रबंधन के आश्वासन पर अब मजदूरों का भरोसा कम, उरीमारी में बैठक कर आंदोलन तेज करने का लिया निर्णय

उरीमारी: बरका-सायल क्षेत्र के उरीमारी स्थित गांधी मैदान में गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को कार्तिक माइनिंग (Kartik Mining) आउटसोर्सिंग कंपनी से जुड़े मजदूरों की अहम बैठक हुई। बैठक में मजदूरों ने HPC (हाई पावर कमेटी) रेट के अनुसार मजदूरी भुगतान समेत लंबे समय से लंबित अन्य मांगों पर चर्चा की। काफी देर तक चली बातचीत के बाद मजदूरों ने प्रबंधन को 15 सितंबर तक का समय देने का निर्णय लिया।

पहले आंदोलन के बाद मिला था आश्वासन

मजदूरों ने बैठक में कहा कि अपनी मांगों को लेकर वे पहले भी आंदोलन कर चुके हैं। उस दौरान काम और कोयला उत्पादन प्रभावित हुआ था। आंदोलन के बाद प्रबंधन की ओर से आश्वासन दिया गया था कि 15 सितंबर से पहले उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल की जाएगी। मजदूरों का कहना है कि समय सीमा नजदीक आने के बावजूद अभी तक ऐसा कोई ठोस कदम दिखाई नहीं दिया है।

आश्वासन से आगे कार्रवाई की मांग

बैठक में मजदूर पितांबर बेसरा, अनिल सोरेन, उमेश और राजू समेत अन्य श्रमिकों ने अपनी बात रखी। मजदूरों का आरोप है कि उनकी मांगों को लेकर प्रबंधन की ओर से फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। उनका कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद यदि समस्या का समाधान नहीं होता है तो आंदोलन के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं बचेगा।

15 सितंबर के बाद आंदोलन तेज करने की चेतावनी

मजदूरों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि यदि 15 सितंबर 2026 तक उनकी मांगों पर ठोस और सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा। बैठक में यह भी कहा गया कि जरूरत पड़ने पर बिरसा परियोजना, उरीमारी में कोयला उत्पादन और कामकाज को पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया जा सकता है।

चार प्रमुख मांगों पर बनी सहमति

बैठक में मजदूरों ने अपनी प्रमुख मांगों को दोहराते हुए कहा कि भुगतान और काम से जुड़े अधिकारों में किसी तरह की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। उनकी मुख्य मांगें हैं—

  • HPC रेट के आधार पर मजदूरी का भुगतान किया जाए।
  • हर महीने 26 दिनों के काम और उसके अनुरूप भुगतान की व्यवस्था हो।
  • सभी मजदूरों को नियमित रूप से वेतन पर्ची (Pay Slip) उपलब्ध कराई जाए।
  • राष्ट्रीय त्योहारों पर मान्यता प्राप्त अवकाश और उससे जुड़े नियमानुसार लाभ दिए जाएं।

‘अब आश्वासन नहीं, चाहिए समाधान’

बैठक में मजदूरों ने साफ कहा कि वे टकराव नहीं चाहते, लेकिन लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उनका कहना है कि कंपनी प्रबंधन को बातचीत के जरिए जल्द समाधान निकालना चाहिए, ताकि कामकाज प्रभावित होने की स्थिति न बने।

एकजुट रहने का आह्वान

मजदूरों ने कहा कि उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सभी श्रमिकों को एकजुट रहना होगा। बैठक के दौरान यह संदेश दिया गया कि यदि 15 सितंबर तक कोई ठोस पहल नहीं होती है तो आगे की रणनीति सामूहिक रूप से तय की जाएगी। फिलहाल मजदूरों की नजर प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

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