Ziaul Haq Murder Case: प्रतापगढ़ के चर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड में कुंडा विधायक एवं जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को बड़ी कानूनी राहत मिली है। लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने मामले की दोबारा जांच के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। अदालत ने राजा भैया समेत पांच लोगों के खिलाफ आगे कार्रवाई की मांग को भी खारिज कर दिया। यह आदेश 19 सितंबर 2026 को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा सिंह की अदालत ने दिया।
यह मामला वर्ष 2013 में प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र के बलीपुर गांव में हुई घटनाओं से जुड़ा है। दो मार्च 2013 को ग्राम प्रधान नन्हे यादव की हत्या के बाद मौके पर पहुंचे तत्कालीन सीओ जियाउल हक की भी हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई। जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में राजा भैया समेत अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग उठी थी।

सीबीआई ने दोबारा विवेचना के बाद दिसंबर 2023 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। अदालत में दोनों पक्षों को सुनने और उपलब्ध दस्तावेजों व साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अब अदालत ने सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। वहीं, इस हत्याकांड के अन्य आरोपियों से संबंधित मुकदमे का परिणाम इस आदेश से अलग है। वर्ष 2024 में मामले के 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है।
शिव महापुराण के मंच से बयान भी चर्चा में
इधर, अदालत से मिली राहत के बीच राजा भैया का हालिया रायबरेली दौरा भी चर्चा में है। ऊंचाहार क्षेत्र में आयोजित शिव महापुराण कथा में पहुंचे राजा भैया ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने प्रदर्शन में इस्तेमाल भाषा और कथित नारों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि राष्ट्र और सभ्यता के सामने चुनौतियों को लेकर लोगों को सजग और सबल होना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने “शास्त्र के साथ शस्त्र भी धारण करना होगा” की बात कही थी। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह चर्चा का विषय बना।
राजा भैया का यह बयान ऐसे समय आया जब वह रायबरेली के ऊंचाहार में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने दिल्ली के प्रदर्शन को लेकर अपने विचार मंच से रखे और भारतीय संस्कृति व मूल्यों के प्रति सजग रहने की अपील की। उनके बयान को लेकर राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं।
इस तरह एक ओर 13 साल पुराने जियाउल हक हत्याकांड में अदालत के फैसले से राजा भैया को कानूनी राहत मिली है, तो दूसरी ओर रायबरेली के शिव महापुराण मंच से दिए गए उनके बयान ने राजनीतिक चर्चा को भी गर्म कर दिया है।










