बोकारो थर्मल पावर स्टेशन में 5 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान, सफाई मजदूरों ने प्लांट जाम करने की दी चेतावनी

वर्षों से लंबित मांगों को लेकर भड़के अनुबंधित मजदूर, प्रबंधन पर वादाखिलाफी और दबाव बनाने का लगाया आरोप

बोकारो थर्मल पावर स्टेशन (बीटीपीएस) में कार्यरत अनुबंधित सफाई मजदूरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला किया है। मजदूरों ने घोषणा की है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे 5 जून 2026 से अनिश्चितकालीन ‘टूल डाउन’ हड़ताल पर चले जाएंगे। इस संबंध में मजदूरों ने बीटीपीएस के मुख्य महाप्रबंधक को लिखित नोटिस भी सौंप दिया है।

मजदूरों के इस फैसले से प्लांट प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है। सफाई व्यवस्था किसी भी औद्योगिक इकाई का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है और ऐसे में सफाई कर्मियों की हड़ताल का असर प्लांट के नियमित संचालन पर पड़ सकता है। मजदूरों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो वे केवल काम बंद नहीं करेंगे, बल्कि प्लांट के मुख्य द्वार को भी जाम कर देंगे।

सुविधाएं नहीं मिलने से नाराज हैं मजदूर

अनुबंधित सफाई मजदूरों का कहना है कि उन्हें लंबे समय से कई बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। उनका आरोप है कि प्रधान कार्यालय द्वारा कई बार आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए, लेकिन स्थानीय स्तर पर उन आदेशों का पालन नहीं किया गया।

मजदूरों के अनुसार वे वर्षों से अपनी समस्याओं को लेकर प्रबंधन के सामने आवाज उठाते रहे हैं। कई बार मौखिक रूप से और कई बार लिखित आवेदन देकर उन्होंने अपनी मांगों और परेशानियों से अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। जमीन पर किसी प्रकार का ठोस समाधान नहीं निकला।

मजदूरों का कहना है कि लगातार उपेक्षा और अनदेखी के कारण अब उनके पास आंदोलन के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

अधिकार मांगने पर धमकी देने का आरोप

मजदूरों ने स्थानीय प्रबंधन पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि जब भी वे अपने अधिकारों और सुविधाओं की मांग करते हैं, तो उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की जाती है। कई मजदूरों ने आरोप लगाया कि उन्हें काम से हटाने या बैठाने की धमकी दी जाती है, जिससे वे मानसिक दबाव में काम करने को मजबूर होते हैं।

मजदूरों का कहना है कि वे केवल अपने वैध अधिकार और सम्मानजनक कार्य वातावरण की मांग कर रहे हैं। लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

5 जून से ‘टूल डाउन’ हड़ताल की तैयारी

मजदूरों ने स्पष्ट किया है कि यदि 5 जून से पहले उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है तो वे पूरी तरह से काम बंद कर देंगे। ‘टूल डाउन’ हड़ताल के तहत सभी सफाई कर्मी अपने कार्य उपकरण रख देंगे और किसी प्रकार का काम नहीं करेंगे।

इसके साथ ही मजदूरों ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर वे प्लांट के मुख्य प्रवेश द्वार को भी जाम करेंगे। इससे प्लांट में आने-जाने और अन्य गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।

मजदूरों का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे अपने आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।

संभावित नुकसान के लिए प्रबंधन को ठहराया जिम्मेदार

हड़ताल की घोषणा करते हुए मजदूरों ने साफ कहा है कि आंदोलन के कारण यदि किसी प्रकार की अव्यवस्था या नुकसान होता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रबंधन की होगी।

मजदूरों का कहना है कि उन्होंने कई बार बातचीत और समझौते का रास्ता अपनाया, लेकिन जब उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आखिरकार उन्हें आंदोलन का फैसला लेना पड़ा। उनका मानना है कि समय रहते प्रबंधन ने उनकी बात सुनी होती तो यह स्थिति पैदा नहीं होती।

कई मजदूर नेता आंदोलन में सक्रिय

इस आंदोलन का नेतृत्व कई श्रमिक प्रतिनिधि और कर्मचारी कर रहे हैं। इनमें रंजीत कुमार, गोविंद घांसी, उमेश राम, बिनोद मांझी, मोती तुरी, रंजीत राम, किरण कुमार, संजय कुमार राम, सुमित्रा देवी और मालती देवी प्रमुख रूप से शामिल हैं।

इन सभी ने संयुक्त रूप से प्रबंधन को चेतावनी दी है कि मजदूरों की मांगों की अनदेखी अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी सफाई कर्मियों से आंदोलन में एकजुट होकर भाग लेने की अपील भी की है।

संबंधित विभागों को भी भेजी गई सूचना

मजदूरों ने अपने मांग पत्र और हड़ताल नोटिस की प्रतिलिपि कई संबंधित विभागों और अधिकारियों को भी भेजी है। इनमें वरीय प्रबंधक (मानव संसाधन), वरीय प्रबंधक (असैनिक), सीआईएसएफ अधिकारी, संबंधित ठेकेदार, डीवीसी एएमसी/एआरसी मजदूर संगठन, ईडीसीएल तथा बीटीपीएस थाना प्रभारी शामिल हैं।

इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आंदोलन और मजदूरों की मांगों की जानकारी सभी संबंधित पक्षों तक पहुंचे और समाधान के लिए पहल की जा सके।

वार्ता से निकल सकता है समाधान

अब सभी की नजर प्रबंधन और मजदूरों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हुई है। यदि दोनों पक्षों के बीच जल्द वार्ता होती है और मांगों पर सहमति बन जाती है, तो हड़ताल को टाला जा सकता है।

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