Sahitya Bhushan Award 2026: डॉ. पारूल राज को मुंबई में मिला साहित्य भूषण सम्मान 2026, साहित्य सेवा के लिए हुआ भव्य सम्मान

Sahitya Bhushan Award 2026: बोरीवली में प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय अधिवेशन में पद्मश्री सोमा घोष और डॉ. शंकर अंदानी ने किया सम्मानित, साहित्य और पत्रकारिता जगत की हस्तियों ने बढ़ाई समारोह की गरिमा

Sahitya Bhushan Award 2026: साहित्य, संस्कृति और पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ी कई जानी-मानी हस्तियों की मौजूदगी में मुंबई के बोरीवली स्थित अटल उद्यान भवन में 12 सितंबर को एक विशेष समारोह आयोजित किया गया। प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (रजिस्टर्ड) के चौथे राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान नई दिल्ली की कवयित्री, शिक्षिका और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. पारूल राज को उनके साहित्यिक योगदान के लिए साहित्य भूषण सम्मान 2026 प्रदान किया गया।

साहित्य सेवा के लिए मिला प्रतिष्ठित सम्मान

डॉ. पारूल राज को यह सम्मान सुप्रसिद्ध गायिका एवं पद्मश्री से सम्मानित सोमा घोष और वरिष्ठ समाजसेवी एवं साहित्यकार डॉ. शंकर अंदानी, जिन्हें ‘राष्ट्र माणिक’ सम्मान से नवाजा जा चुका है, ने प्रदान किया। मंच पर सम्मान प्राप्त करते समय मौजूद लोगों ने तालियों के साथ उनका अभिनंदन किया।

राष्ट्रीय अधिवेशन में जुटीं कई हस्तियां

बोरीवली के अटल सभागृह में हुए इस राष्ट्रीय अधिवेशन में देश के अलग-अलग हिस्सों से पत्रकार, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता और संस्कृति से जुड़े लोग पहुंचे। समारोह का केंद्र साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों का सम्मान रहा। इसी क्रम में देशभर से आए पत्रकारों को भी उनके कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।

कविता से लेकर गीत और गजल तक पहचान

डॉ. पारूल राज की साहित्यिक यात्रा कई विधाओं तक फैली हुई है। कविता के साथ-साथ छंद, गजल और गीत लेखन में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी रचनाओं में भावनात्मक संवेदनाओं के साथ सहज भाषा और अभिव्यक्ति की स्पष्टता देखने को मिलती है, जिसके कारण साहित्य प्रेमियों के बीच उनके लेखन को पसंद किया जाता है।

सरल व्यक्तित्व ने भी खींचा ध्यान

समारोह में डॉ. पारूल राज के साहित्यिक योगदान की चर्चा के साथ उनके व्यक्तित्व का भी उल्लेख हुआ। साहित्यिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार, गंभीर और संवेदनशील विषयों पर प्रभावी लेखन करने के बावजूद उनका व्यवहार बेहद सहज और सरल है। यही सहजता उनके लेखन में भी दिखाई देती है।

शिक्षण और सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ी हैं

डॉ. पारूल राज केवल साहित्य लेखन तक सीमित नहीं हैं। वह अध्यापन और सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़ी रही हैं। साहित्य को समाज और संवेदनाओं से जोड़ने की उनकी कोशिश उनके रचनात्मक कार्यों में नजर आती है। इसी व्यापक योगदान को देखते हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में उन्हें साहित्य भूषण सम्मान से नवाजा गया।

सम्मान से बढ़ा साहित्यिक सफर का उत्साह

साहित्य भूषण सम्मान 2026 मिलने के बाद डॉ. पारूल राज के साहित्यिक सफर में एक और उपलब्धि जुड़ गई। मुंबई में मिला यह सम्मान उनके लेखन और साहित्य सेवा को राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान के तौर पर देखा जा रहा है। समारोह में मौजूद साहित्य और पत्रकारिता जगत के लोगों ने उनके आगामी साहित्यिक कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं।

सम्मान समारोह बना यादगार अवसर

प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के चौथे राष्ट्रीय अधिवेशन ने साहित्य और पत्रकारिता के बीच संवाद का अवसर भी दिया। एक ओर जहां पत्रकारों को उनके कार्यों के लिए सम्मान मिला, वहीं साहित्य के क्षेत्र में योगदान देने वाली डॉ. पारूल राज को साहित्य भूषण सम्मान प्रदान किया गया। मुंबई में आयोजित यह समारोह उनके लिए सम्मान के साथ-साथ साहित्यिक यात्रा का यादगार पड़ाव बन गया।

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