ईरान-US तनाव के बीच भारत आ रहे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, आखिर क्या है इस दौरे का मकसद?

QUAD बैठक, चीन की चुनौती और व्यापार—कई बड़े मुद्दों पर होगी चर्चा

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के माहौल में अब अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio का भारत दौरा काफी चर्चा में है। खबर है कि मार्को रूबियो 23 से 26 मई के बीच भारत आएंगे और इस दौरान कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे। माना जा रहा है कि यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की बड़ी रणनीति से जुड़ा हुआ है।

QUAD बैठक पर पूरी दुनिया की नजर

भारत में इस बार QUAD देशों की अहम बैठक होने जा रही है। QUAD यानी भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का ऐसा समूह जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए काम करता है।

मार्को रूबियो इसी बैठक में हिस्सा लेने भारत आ रहे हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में चीन की बढ़ती ताकत और उसके प्रभाव को लेकर विस्तार से चर्चा होगी। खासतौर पर दक्षिण चीन सागर, ताइवान और हिंद महासागर में चीन की गतिविधियां QUAD देशों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।

चीन को लेकर अमेरिका की बड़ी रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका अब एशिया में अपने सहयोगियों को और मजबूत करना चाहता है। भारत इस रणनीति का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिका चाहता है कि भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाए ताकि चीन का दबदबा कम किया जा सके।

इसी वजह से QUAD को लगातार मजबूत किया जा रहा है। अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया पहले ही कई बार चीन को लेकर चिंता जता चुके हैं। अब भारत के साथ मिलकर साझा रणनीति बनाने की कोशिश हो रही है।

भारत-अमेरिका व्यापार पर भी होगी बात

मार्को रूबियो के इस दौरे में सिर्फ सुरक्षा और राजनीति ही नहीं, बल्कि व्यापार और निवेश पर भी चर्चा होने की संभावना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और टेक्नोलॉजी साझेदारी जैसे मुद्दे एजेंडे में शामिल हैं।

अमेरिका और भारत पिछले कुछ समय से व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देश चाहते हैं कि सप्लाई चेन चीन पर कम निर्भर हो और नई आर्थिक साझेदारी विकसित की जाए।

ईरान संकट के बीच क्यों अहम है यह दौरा?

इस समय मध्य पूर्व में हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान और अमेरिका के बीच लगातार बयानबाजी और सैन्य तनाव बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में मार्को रूबियो का भारत दौरा और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत के ईरान, रूस और अमेरिका—तीनों देशों से अच्छे संबंध हैं। इसलिए अमेरिका भारत के साथ मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा पर भी चर्चा करना चाहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मध्य पूर्व में बड़ा संघर्ष होता है तो उसका असर तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

पीएम मोदी और जयशंकर से हो सकती है मुलाकात

रिपोर्ट्स के अनुसार मार्को रूबियो भारत में प्रधानमंत्री Narendra Modi, विदेश मंत्री S. Jaishankar और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात कर सकते हैं। इन बैठकों में रक्षा, आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा और नई टेक्नोलॉजी जैसे मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।

भारत के लिए क्या महत्व है इस दौरे का?

भारत के लिए यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। एक तरफ भारत अमेरिका के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह रूस और ईरान जैसे देशों के साथ भी संतुलन बनाए रखना चाहता है।

भारत की कोशिश है कि वह किसी एक गुट का हिस्सा दिखने के बजाय अपनी स्वतंत्र विदेश नीति जारी रखे। लेकिन QUAD और इंडो-पैसिफिक रणनीति में भारत की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।

आने वाले दिनों में बढ़ सकती है हलचल

मार्को रूबियो का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया कई बड़े संकटों से गुजर रही है। यूक्रेन युद्ध, ईरान तनाव, चीन-अमेरिका प्रतिस्पर्धा और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की जो भूमिका है वो पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।

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