Nepal Flood: नेपाल में बुधवार की सुबह कुछ ऐसा हुआ, जिसने स्थानीय लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। भोटेकोशी नदी का पानी अचानक तेजी से बढ़ा और देखते ही देखते नदी ने विकराल रूप ले लिया। बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा जिले में दिखाई दिया, जबकि नुवाकोट और धाडिंग भी इसकी चपेट में आ गए। तेज बहाव अपने साथ सड़कें, पुल, वाहन और बिजली से जुड़े ढांचे तक बहा ले गया। 300 से ज्यादा लोगों के लापता होने की आशंका ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है।
सुबह करीब 9 बजे बढ़ा नदी का जलस्तर

अधिकारियों के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 9 बजे भोटेकोशी नदी का जलस्तर सामान्य से अचानक काफी ऊपर पहुंच गया। कुछ ही देर में पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि नदी किनारे मौजूद इलाकों में अफरातफरी मच गई। बागमती प्रांत के पुलिस प्रवक्ता एसएसपी राजेंद्र प्रसाद धमाला ने 16 शव मिलने की जानकारी दी है। इनमें रसुवा से एक, नुवाकोट से नौ और धाडिंग से छह शव बरामद किए गए हैं।
नेपाल में बारिश नहीं हुई तो पानी आया कहां से?
इस घटना का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रभावित इलाकों में ऐसी भारी बारिश की सूचना नहीं थी, तो आखिर नदी में इतना पानी आया कहां से? शुरुआती जांच में पानी के तिब्बत की ओर से आने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल एवलांच, ग्लेशियल झील के अचानक फटने या ऊपरी इलाकों में किसी प्राकृतिक अवरोध के टूटने जैसी संभावनाओं पर जांच चल रही है।
एवलांच ने रोका पानी और फिर टूटा बांध जैसा दबाव?
काठमांडू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एवं क्लाइमेट रिसर्चर रिजन भक्त कायस्थ ने शुरुआती जानकारी के आधार पर एक अहम संभावना सामने रखी है। उनके अनुसार, एवलांच के कारण ल्हेंडे नदी का प्रवाह कुछ समय के लिए रुक गया होगा। यदि ऐसा हुआ तो पानी एक जगह जमा होकर दबाव बनाता गया होगा। अचानक रास्ता खुलने पर यही पानी तेज रफ्तार के साथ नीचे की ओर आया और भोटेकोशी नदी में भीषण बाढ़ का कारण बना हो सकता है।
तिब्बत में आया भूकंप भी जांच के दायरे में
बाढ़ से कुछ समय पहले तिब्बत क्षेत्र में भूकंप भी दर्ज किया गया था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। ऐसे में यह संभावना भी जांची जा रही है कि भूकंपीय हलचल ने कहीं बर्फ, चट्टान या ग्लेशियल झील से जुड़े किसी प्राकृतिक अवरोध को प्रभावित तो नहीं किया।
ग्लेशियल झील फटने की आशंका क्यों?
हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियल झीलें तेजी से बढ़ती चिंता का कारण हैं। पहाड़ों में जमा बर्फ और ग्लेशियरों के पिघलने से कई जगह झीलें बन जाती हैं। यदि किसी कारण से इनका प्राकृतिक बांध टूट जाए तो लाखों घन मीटर पानी अचानक नीचे की ओर बह सकता है। वर्ष 2025 में भी भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ को ल्हेंडे नदी क्षेत्र में ग्लेशियल झील से जुड़ी घटना से जोड़ा गया था। हालांकि, मौजूदा बाढ़ में यही कारण जिम्मेदार है, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सेना ने संभाला मोर्चा, 12 हेलीकॉप्टर लगाए
तबाही के बाद नेपाल प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। नेपाल सेना ने सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं। त्रिशूली के मिलिट्री सेंटर को अस्थायी अस्पताल में बदला गया है, ताकि बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा सुविधा दी जा सके।
ग्लेशियल झील पर विशेषज्ञों की नजर
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि नेपाल में आई इस अचानक बाढ़ की एकमात्र वजह क्या थी। विशेषज्ञ एवलांच, ग्लेशियल झील, भूकंप और ऊपरी क्षेत्रों में पानी के अचानक जमा होने जैसी सभी संभावनाओं को जोड़कर देख रहे हैं। सैटेलाइट तस्वीरों, नदी के जलस्तर और पहाड़ी क्षेत्रों से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर ही पूरी तस्वीर साफ होगी।










