रायबरेली जिले के मिल एरिया थाना क्षेत्र स्थित छजलापुर गांव में पैतृक भूमि को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। गांव के एक परिवार ने अपनी जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश किए जाने का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। मामले को लेकर बुधवार को पीड़ित पक्ष ने जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र सौंपा।
न्यायालय के आदेश का हवाला देकर उठाए सवाल
छजलापुर निवासी रमाशंकर तिवारी का कहना है कि जिस भूमि को लेकर विवाद चल रहा है, उसके संबंध में न्यायालय पहले ही उनके पक्ष में फैसला सुना चुका है। उनका दावा है कि न्यायालय की डिक्री होने के बावजूद कुछ लोग जमीन पर अपना कब्जा स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस स्थिति ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्र में भूमि विवादों और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गांव के कुछ लोगों पर लगाए गंभीर आरोप
शिकायत में गांव के ही कुछ लोगों को नामजद करते हुए आरोप लगाया गया है कि वे विवादित भूमि पर जबरन हस्तक्षेप कर रहे हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि कई बार विरोध दर्ज कराने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। उनका आरोप है कि दबाव बनाने के लिए लगातार ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे परिवार मानसिक तनाव में है।
धमकी और अभद्रता का भी आरोप
रमाशंकर तिवारी ने प्रशासन को दिए गए पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि विरोध करने पर उन्हें और उनके परिवार को कथित तौर पर धमकियां दी जाती हैं। उनका कहना है कि परिवार के सदस्यों को डराने-धमकाने का प्रयास किया गया, जिससे घर के लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। पीड़ित परिवार ने इसे कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।
घर के सामने कूड़ा डालने की शिकायत
भूमि विवाद के साथ-साथ पीड़ित ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनके अनुसार कुछ लोग उनके घर के सामने नियमित रूप से कूड़ा-कचरा डालते हैं, जिससे विवाद और अधिक बढ़ता जा रहा है। शिकायत में कहा गया है कि इसका विरोध करने पर अभद्र व्यवहार किया जाता है। ग्रामीणों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा भी तेज हो गई है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही विवादित भूमि को कब्जामुक्त कराए जाने और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील भी की है। उनका कहना है कि यदि न्यायालय के आदेश के बावजूद विवाद बना रहता है तो इससे आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित हो सकता है।
कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल मामला जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के संज्ञान में पहुंच चुका है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिकायत की जांच किस स्तर पर की जाती है और संबंधित अधिकारियों द्वारा क्या कदम उठाए जाते हैं। समाचार लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।










