रायबरेली में ‘हैवी कनेक्शन’ बना किसान की मुसीबत, लाखों जमा फिर भी नहीं मिली बिजली

सात महीने से भटक रहा किसान, अधिकारियों पर कमीशनखोरी और अवैध वसूली के गंभीर आरोप

रायबरेली: यूपी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति बिजली विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों पर बेअसर साबित हो रही है। अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है और उपभोक्ताओं को दौड़ाया जा रहा है। बिजली कनेक्शन के नाम पर एक किसान से अवैध वसूली की रकम भी ले ली और कार्य भी नहीं किया अब अधिकारी और कर्मचारी किसान को गुमराह कर रहे हैं।

पीड़ित किसान दर-दर भटकने को मजबूर

बताते हुए चलें कि डलमऊ तहसील क्षेत्र के पखरामऊ गांव निवासी सुशील अग्निहोत्री ने आरोप लगाया है कि उन्होंने लघु सिंचाई के तहत बोरिंग कराई जिसको करीब 7 माह हो गया है। फरवरी माह में बिजली कनेक्शन के लिए सभी आवश्यक प्रक्रिया पूरी की। जिसमें विद्दुत मैटीरियल के लिए, अनुदान का 68000 और 128000 जमा करा लिया गया है, लेकिन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी महीनों बीत जाने के बाद भी उनका कनेक्शन नहीं किया गया, न बिजली के पोल लगाए गए है। किसान का कहना है कि 27 फरवरी से भटक रहा है जबकि मटेरियल का बिल 128000 और 68000 पहले ही ले लिया गया। लेकिन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कमीशनखोरी के चक्कर में काम करने को तैयार नहीं हैं।

पीड़ित के मुताबिक, बिजली विभाग के जेई और एक्सईएन स्तर के कर्मचारियों द्वारा लगातार पैसे की मांग की जा रही है। लघु सिंचाई के इंजीनियर अरुण शुक्ला ने भी 16,000 कमीसन पीड़ित किसान से लिया मोटर केबल और तार व अन्य मैटेरियल के लिए बिना पैसे दिए कोई काम नहीं हो रहा,” किसान ने आरोप लगाते हुए कहा।

सुशील अग्निहोत्री का दावा है कि वह बिजली विभाग को ₹2,34,000 डीडी के माध्यम से दे चुके हैं, जबकि बोरिंग के लिए ब्लॉक स्तर पर ₹1,22,000 अलग से DD जमा कराया गया।

पीड़ित ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिशासी अभियंता रितेश दुबे,कर्मचारी हिमांशु सिंह और जल निगम के जेई अरुण शुक्ला सहित कई अधिकारियों ने अवैध वसूली की। “हर दफ्तर में पैसा दो, तब ही फाइल आगे बढ़ती है,” उन्होंने कहा।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि सिंचाई की व्यवस्था न होने के कारण किसान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो रही है। “बोरिंग होने के बाद भी पानी नहीं मिल रहा, जिससे खेत सूख रहे हैं और हमारी मेहनत बर्बाद हो रही है,” पीड़ित ने अपनी पीड़ा जाहिर की।

न्याय की आस में किसान अब जिलाधिकारी से मिलने पहुंचा है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।

बड़ा सवाल

जब सरकार भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा कर रही है, तो आखिर जमीनी स्तर पर यह खुला खेल कब तक चलता रहेगा? क्या पीड़ित किसान को न्याय मिलेगा या फिर फाइलों में ही दबकर रह जाएगा यह मामला?

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