Raebareli: एनीमिया से जंग में कारगर साबित हो रहा FCM Injection, गर्भवती महिलाओं का तेजी से बढ़ रहा हीमोग्लोबिन

Raebareli FCM Injection: तीन महीने में 286 गर्भवती और धात्री महिलाओं को मिला उपचार, फॉलोअप जांच में दिखा बेहतर परिणाम; सुरक्षित मातृत्व अभियान को मिल रही नई रफ्तार

Raebareli FCM Injection: गर्भावस्था के दौरान होने वाला एनीमिया मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए गंभीर स्वास्थ्य चुनौती माना जाता है। इसी समस्या को कम करने के उद्देश्य से रायबरेली में स्वास्थ्य विभाग ने फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (FCM) इंजेक्शन की सुविधा शुरू की है। पिछले तीन महीनों के आंकड़े बताते हैं कि यह पहल असर दिखाने लगी है। अब तक 286 गर्भवती और धात्री महिलाओं को यह इंजेक्शन लगाया जा चुका है, जबकि फॉलोअप जांच में कई महिलाओं के हीमोग्लोबिन स्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।

फॉलोअप रिपोर्ट में दिखा सकारात्मक बदलाव

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिन 96 महिलाओं की इंजेक्शन के लगभग एक महीने बाद दोबारा जांच कराई गई, उनमें औसतन 1.5 से 2.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर तक हीमोग्लोबिन बढ़ा। अधिकारियों का कहना है कि समय पर उपचार और नियमित निगरानी से एनीमिया पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो रहा है। इससे गर्भावस्था के दौरान होने वाली कई जटिलताओं का खतरा भी कम किया जा सकता है।

रोशनी की कहानी बनी अन्य महिलाओं के लिए मिसाल

सलोन ब्लॉक के सरैया गांव की रहने वाली रोशनी को गर्भावस्था के दौरान कमजोरी महसूस हो रही थी। स्वास्थ्य शिविर में जांच के दौरान उनका हीमोग्लोबिन केवल 8 ग्राम प्रति डेसीलीटर पाया गया। स्वास्थ्यकर्मियों की सलाह पर उन्हें एफआरयू सलोन में एफसीएम इंजेक्शन लगाया गया। करीब एक महीने बाद हुई दोबारा जांच में उनका हीमोग्लोबिन बढ़कर 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर पहुंच गया। अब वह खुद को पहले की तुलना में अधिक स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस करती हैं और अन्य गर्भवती महिलाओं को भी समय पर जांच और इलाज कराने की सलाह देती हैं।

समय पर इलाज से कम हो सकता है मातृ स्वास्थ्य का जोखिम

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती और धात्री महिलाओं की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर एफसीएम इंजेक्शन दिया जा रहा है। उनका कहना है कि आयरन की कमी तेजी से पूरी होने के कारण शरीर में हीमोग्लोबिन बनने की प्रक्रिया बेहतर होती है। यही वजह है कि कुछ ही सप्ताह में जांच रिपोर्ट में सुधार दिखाई देने लगता है।

उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान एनीमिया की अनदेखी करने पर समयपूर्व प्रसव, कम वजन के शिशु का जन्म और प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए नियमित प्रसवपूर्व जांच बेहद जरूरी है।

इन अस्पतालों में उपलब्ध है FCM इंजेक्शन की सुविधा

जिले में फिलहाल छह स्वास्थ्य संस्थानों पर यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

  • जिला महिला अस्पताल – 43 लाभार्थी
  • एफआरयू सलोन – 70 लाभार्थी
  • एफआरयू ऊंचाहार – 24 लाभार्थी
  • एफआरयू बछरावां – 45 लाभार्थी
  • एफआरयू लालगंज – 51 लाभार्थी
  • एफआरयू डलमऊ – 53 लाभार्थी

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि चिकित्सकों, स्टाफ नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। जरूरत के अनुसार आईवी आयरन सुक्रोज, आयरन-फोलिक एसिड (IFA) और कैल्शियम की दवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

समुदाय की भागीदारी से मजबूत होगा सुरक्षित मातृत्व अभियान

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि केवल सरकारी प्रयासों से ही एनीमिया पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है। इसके लिए परिवार, आशा कार्यकर्ताओं और समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। यदि हर गर्भवती महिला समय पर जांच कराए और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार ले, तो मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में बड़ा सुधार लाया जा सकता है।

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