Raebareli में यादव महासभा की होर्डिंग से सियासी हलचल, सपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव पर लगे गंभीर आरोप

2027 के चुनाव से पहले पोस्टर वार ने बढ़ाई बेचैनी, होर्डिंग में वीरेंद्र यादव को बताया गया यादव समाज का विरोधी; निष्कासन की बात से गरमाई चर्चा

Raebareli: 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के भीतर ही रायबरेली की सियासत में पोस्टर और होर्डिंग के जरिए आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता नजर आ रहा है। शहर के कई इलाकों में यादव महासभा की ओर से लगाए गए एक विवादित होर्डिंग ने समाजवादी पार्टी की अंदरूनी राजनीति को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कौन है यादव महासभा का अध्यक्ष उपाध्यक्ष और इसका सूत्रधार आखिर अचानक यह यादव महासभा बन जाना कई सारे सवाल खड़े करता है। होर्डिंग में समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष इंजीनियर वीरेंद्र यादव पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें “यादव समाज के विरोधी” बताया गया है। इतना ही नहीं, उन्हें समाज से निष्कासित किए जाने की बात भी होर्डिंग में लिखी गई है। आखिर कौन लोग हैं वह समाजवादी पार्टी के अंदर ही भीतरघात करने की कोशिश कर रहे हैं

होर्डिंग के नीचे “निवेदक- यादव महासभा, रायबरेली” अंकित है। हालांकि, इस होर्डिंग को किसने और किन परिस्थितियों में लगवाया, इसकी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। ऐसे में लगाए गए आरोपों को यादव महासभा से जुड़े लोगों की ओर से लगाए गए आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है। होर्डिंग लगवाने ने अपना नाम नहीं लिखा है यह कोच्चि हरकत है अगर विरोध करना है तो खुलकर करें ऐसा लोगों का कहना है।

आरपी यादव प्रकरण के बाद बढ़ी तल्खी

दरअसल, रायबरेली सदर विधानसभा से समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रत्याशी आरपी यादव समेत 14 लोगों को आदित्य सिंह हत्याकांड में अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद मामला पहले ही राजनीतिक रूप से गरमाया हुआ है। सजा के बाद जिला कारागार के बाहर आरपी यादव के समर्थकों ने हंगामा करते हुए नारेबाजी की थी। इस दौरान सपा जिलाध्यक्ष इंजीनियर वीरेंद्र यादव के खिलाफ भी मुर्दाबाद के नारे लगाए जाने की बात सामने आई थी।

इसके बाद सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। बताया जा रहा है कि घटना के करीब दो दिन बाद सपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर सजा पाए दोनों सपा नेताओं के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए पोस्ट किया। इसी को लेकर उनके विरोधियों ने सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। विरोधियों का तर्क है कि यदि पार्टी नेताओं के प्रति संवेदना व्यक्त करनी थी तो तत्काल क्यों नहीं की गई।

पोस्टर ने पुराने राजनीतिक मतभेदों को दी हवा

यादव महासभा के नाम से सामने आया यह होर्डिंग अब इसी राजनीतिक खींचतान को और हवा देता नजर आ रहा है। होर्डिंग में वीरेंद्र यादव को समाज विरोधी बताते हुए समाज से बाहर करने की बात कही गई है। शहर के अलग-अलग स्थानों पर लगे इन बैनरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही हैं।

वीरेंद्र यादव के समर्थक जहां इसे राजनीतिक विरोधियों की साजिश और छवि खराब करने की कोशिश मान सकते हैं, वहीं विरोधी खेमे के लोग इसे समाज के भीतर पनप रहे असंतोष की अभिव्यक्ति बता रहे हैं। फिलहाल, होर्डिंग में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

चार विधायकों को जिताने का दावा, फिर क्यों उठे सवाल?

सपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव के समर्थकों की ओर से यह भी दावा किया जाता रहा है कि उनके कार्यकाल में रायबरेली में समाजवादी पार्टी ने बेहतर राजनीतिक प्रदर्शन किया और पार्टी को जिले में चार विधानसभा सीटों पर जीत हासिल हुई। ऐसे में अब उन्हीं के खिलाफ यादव समाज के नाम से लगाए गए पोस्टर ने कई राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आखिर पार्टी और समाज के भीतर यह टकराव किस दिशा में जाएगा? क्या यह महज आरपी यादव प्रकरण के बाद उपजा आक्रोश है या इसके पीछे समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की स्थानीय राजनीति में चल रही कोई बड़ी खींचतान है?

चुनाव से पहले सियासी तापमान बढ़ने के संकेत

रायबरेली में विधानसभा चुनाव को अभी समय है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियां अभी से तेज होती दिखाई देने लगी हैं। ऐसे में किसी प्रमुख राजनीतिक दल के जिलाध्यक्ष के खिलाफ सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह के आरोपों वाले होर्डिंग लगाए जाना निश्चित तौर पर चर्चा का विषय बन गया है।

अब देखना होगा कि सपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव इस होर्डिंग और लगाए गए आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। और यादव महासभा की ओर से इन आरोपों के समर्थन में आगे क्या कदम उठाया जाता है। फिलहाल विवादित होर्डिंग ने रायबरेली की सियासत में एक नया मुद्दा जरूर खड़ा कर दिया है और 2027 के चुनावी समीकरणों से पहले यादव समाज के भीतर की यह हलचल राजनीतिक दलों के लिए भी चिंता का विषय बन सकती है।

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