Ranchi: राँची के रिंग रोड स्थित झिरी में पिछले करीब दो दशक से जमा कचरे के पहाड़ को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राँची नगर निगम इस परियोजना पर 17 करोड़ 72 लाख 49 हजार 619 रुपये खर्च करेगा। इसके तहत डंपसाइट पर जमा लाखों टन पुराने कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। निगम ने इस पूरी परियोजना को तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
बदबू और प्रदूषण से मिलेगी राहत

झिरी डंपसाइट के आसपास रहने वाले दर्जनों गांवों के लोग लंबे समय से कचरे से निकलने वाली बदबू, जहरीले धुएं और प्रदूषण की समस्या झेल रहे हैं। कचरे के ढेर से निकलने वाली मीथेन गैस और जमीन के भीतर पहुंचने वाले दूषित पानी से पर्यावरण और भूजल पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है। परियोजना पूरी होने के बाद स्थानीय लोगों को इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
बायो-रेमेडिएशन और बायो-माइनिंग से होगा कचरे का निस्तारण
पुराने कचरे को खत्म करने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति बायो-रेमेडिएशन और बायो-माइनिंग अपनाई जाएगी। इसके तहत डंपसाइट पर जमा कचरे को मशीनों की मदद से अलग-अलग श्रेणियों में छांटा जाएगा। इस प्रक्रिया में प्लास्टिक, कपड़ा, चमड़ा, कांच, धातु और मिट्टी जैसे तत्वों को अलग किया जाएगा। इससे कचरे के बड़े ढेर को व्यवस्थित तरीके से हटाने में मदद मिलेगी।
सीमेंट फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में भेजा जाएगा ज्वलनशील कचरा
कचरे की छंटाई के दौरान निकलने वाले ज्वलनशील पदार्थों यानी रिज्यू डिराइव्ड फ्यूल (RDF) को सीमेंट फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में भेजा जाएगा। वहीं, रिसाइकिल होने योग्य प्लास्टिक, धातु, कांच और अन्य सामग्रियों को दोबारा उपयोग में लाने के लिए प्रोसेस किया जाएगा। इससे कचरे का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने और डंपसाइट पर जमा अपशिष्ट की मात्रा कम करने में मदद मिलेगी।
निकली हुई मिट्टी का होगा दोबारा इस्तेमाल
बायो-माइनिंग की प्रक्रिया के दौरान कचरे से अलग होने वाली मिट्टी जैसी सामग्री का भी उपयोग किया जाएगा। निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरने वाली मिट्टी का इस्तेमाल लैंडफिल भरने या सड़क निर्माण जैसे कार्यों में किया जा सकेगा। इस तरह झिरी में वर्षों से जमा कचरे के पहाड़ को हटाकर जमीन को समतल और उपयोगी बनाने की योजना है।
तीन महीने की समय-सीमा में पूरा होगा प्रोजेक्ट
17.72 करोड़ रुपये की इस परियोजना को तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि निर्धारित समय-सीमा में काम पूरा होता है तो झिरी डंपसाइट की वर्षों पुरानी समस्या से निजात मिलने की दिशा में यह महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। इससे न केवल डंपसाइट की जमीन खाली होगी, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने की उम्मीद भी बढ़ेगी।










