Durga Ashtami 2026: शारदीय नवरात्रि के आठवें दिन घरों से लेकर मंदिरों तक माता रानी की भक्ति का अलग ही माहौल देखने को मिलता है। सुबह से ही पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। कहीं मां दुर्गा के जयकारे गूंजते हैं, तो कहीं कन्या पूजन के लिए हलवा, पूरी और काले चने बनाए जाते हैं। यह परंपरा वर्षों से भारतीय परिवारों की धार्मिक आस्था का हिस्सा बनी हुई है। मान्यता है कि अष्टमी पर मां महागौरी की आराधना करने और कन्याओं को सम्मानपूर्वक भोजन कराने से माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मां दुर्गा को क्यों चढ़ाया जाता है हलवा-पूरी का भोग?

नवरात्रि की अष्टमी पर हलवा, पूरी और काले चने का भोग लगाने की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु इसे माता के प्रति प्रेम, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम मानते हैं। पूजा के दौरान सबसे पहले मां दुर्गा को भोग अर्पित किया जाता है। इसके बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांटा जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में भोग तैयार करने और पूजा करने के तरीकों में अंतर हो सकता है, लेकिन माता के प्रति श्रद्धा इस परंपरा का मुख्य आधार है।
कन्या पूजन में नौ बालिकाओं को क्यों दिया जाता है विशेष सम्मान?
नवरात्रि में कन्या पूजन को शक्ति की उपासना से जोड़कर देखा जाता है। कई परिवारों में अष्टमी, जबकि कुछ में नवमी के दिन नौ कन्याओं को आमंत्रित कर उनकी पूजा की जाती है। परंपरा के अनुसार, बालिकाओं को देवी के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर उनके पैर धोए जाते हैं, तिलक लगाया जाता है और भोजन कराया जाता है। इसके बाद सामर्थ्य के अनुसार उपहार या दक्षिणा दी जाती है। धार्मिक विश्वास है कि इस पूजा से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। इस परंपरा का एक महत्वपूर्ण संदेश बालिकाओं के प्रति सम्मान और सेवा की भावना भी है।
हलवा, पूरी और काले चने में क्या है खास?
इस पारंपरिक प्रसाद में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के अपने पोषण संबंधी गुण हैं। काले चने प्रोटीन और फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। सूजी से तैयार हलवा शरीर को कार्बोहाइड्रेट के जरिए ऊर्जा देता है, जबकि पूरी भी ऊर्जा प्रदान करती है। हालांकि, पूरी तलकर बनाई जाती है और हलवे में चीनी तथा घी की मात्रा अधिक हो सकती है। इसलिए इसे सीमित मात्रा में खाना बेहतर है। लंबे उपवास के बाद एक साथ बहुत अधिक या भारी भोजन करने के बजाय अपनी सेहत और पाचन क्षमता के अनुसार प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।
दुर्गा अष्टमी पर कैसे करें भोग और कन्या पूजन?
अष्टमी के दिन स्नान के बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां दुर्गा की आराधना करें। इसके बाद अपनी पारिवारिक परंपरा और पूजा-विधि के अनुसार हलवा, पूरी और काले चने का भोग लगाएं। कन्या पूजन करने वाले परिवार बालिकाओं को आदरपूर्वक आमंत्रित कर भोजन कराते हैं और उन्हें उपहार या दक्षिणा देते हैं। पूजा के बाद प्रसाद बांटकर परिवार और आसपास के लोगों के साथ खुशियां साझा की जाती हैं।
अष्टमी की परंपरा देती है सम्मान और सेवा का संदेश
दुर्गा अष्टमी पर हलवा-पूरी और काले चने का प्रसाद केवल भोजन तक सीमित नहीं है। यह परंपरा लोगों को सेवा, सम्मान और मिल-जुलकर त्योहार मनाने की प्रेरणा देती है। कन्या पूजन के जरिए बालिकाओं के सम्मान का संदेश दिया जाता है, जबकि प्रसाद वितरण से आपसी सद्भाव बढ़ता है। यही वजह है कि बदलते समय के बावजूद नवरात्रि की यह परंपरा आज भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है।










