Rewa Cafe Couple Cabin : रीवा शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में इन दिनों एक गंभीर और चिंताजनक मामला सुर्खियों में है। शहर की मुख्य सड़कों और कोचिंग सेंटरों के आसपास खुले कैफे और रेस्टोरेंट में बने तथाकथित ‘कपल केबिन’ अब अनैतिक गतिविधियों का अड्डा बनते जा रहे हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि सिविल लाइन थाना क्षेत्र में पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही। लोग कहते हैं कि हर महीने एक सिपाही ‘जांच’ के नाम पर आता है, फिर सब कुछ सामान्य हो जाता है। आखिर यह खेल क्या है? और क्यों नहीं रुक रहा?
‘कपल केबिन’ क्या हैं और कहां हैं?

रीवा में कई कैफे और रेस्टोरेंट अब सिर्फ खाने-पीने की जगह नहीं रहे। इनमें छोटे-छोटे निजी कमरे या केबिन बनाए गए हैं, जिन्हें ‘कपल केबिन’ कहा जाता है। ये खासकर उन इलाकों में ज्यादा हैं जहां बड़े कोचिंग सेंटर हैं – जैसे सिविल लाइन, नेहरू नगर और अन्य मुख्य सड़कें।
ये केबिन कोचिंग पढ़ने आने वाले युवा लड़के-लड़कियों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन्हें घंटे के हिसाब से किराए पर दिया जाता है। बाहर से देखने में यह पढ़ाई या दोस्तों के साथ समय बिताने की जगह लगती है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। कई लोग कहते हैं कि इन केबिनों में अनैतिक गतिविधियां खुलेआम हो रही हैं, जो समाज और युवाओं के भविष्य के लिए खतरनाक है।
कमाई का धंधा: दोगुना चार्ज, अलग से किराया
कैफे संचालकों ने इन कपल केबिनों को कमाई का बड़ा जरिया बना लिया है। अगर आप केबिन में बैठते हैं, तो खाने-पीने की चीजों का दाम दोगुना लिया जाता है। इसके अलावा, केबिन के इस्तेमाल का अलग से मोटा किराया वसूला जाता है। मसलन, एक कॉफी जो बाहर 50 रुपये की है, केबिन में 100-150 रुपये की पड़ सकती है। साथ ही, प्रति घंटे 200-500 रुपये तक का केबिन चार्ज लिया जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ पैसे कमाने का खेल नहीं, बल्कि गलत गतिविधियों को बढ़ावा देने का जरिया बन रहा है। कोचिंग के नाम पर आने वाले कई युवा इन केबिनों में समय बिताते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है और गलत रास्तों की ओर बढ़ रहे हैं।
पुलिस पर क्यों उठ रहे सवाल?
सिविल लाइन थाना क्षेत्र में यह सब कुछ पुलिस की नाक के नीचे हो रहा है। लोग बताते हैं कि हर महीने की 1 से 10 तारीख के बीच एक सिपाही इन कैफे और होटलों में ‘जांच’ के लिए जाता है। लेकिन यह जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाती है। सिपाही के आने के बाद सब कुछ ‘सामान्य’ घोषित कर दिया जाता है, और यह धंधा बेरोकटोक चलता रहता है।
लोगों का सवाल है – अगर कोई गलत काम नहीं हो रहा, तो हर बार जांच में सब कुछ सही कैसे मिल जाता है? क्या यह सिर्फ दिखावा है? या फिर इसके पीछे कोई सेटिंग है? स्थानीय व्यापारियों और अभिभावकों में चर्चा है कि पुलिस की मिलीभगत के बिना इतना खुला खेल मुमकिन नहीं।
पहले भी उठ चुके हैं गंभीर आरोप
यह कोई नई बात नहीं है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के कुछ होटलों और कैफे के केबिन पहले भी विवादों में रहे हैं। कुछ साल पहले इन जगहों पर शोषण और अनैतिक गतिविधियों के आरोप लगे थे। लेकिन इन मामलों की गहराई से जांच कभी नहीं हुई। नतीजा यह है कि यह धंधा और बढ़ता जा रहा है।
समाज और युवाओं पर असर
यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि समाज और युवाओं के भविष्य से जुड़ा है। कोचिंग सेंटरों के आसपास ये कैफे इसलिए ज्यादा हैं, क्योंकि वहां युवा आसानी से आ-जा सकते हैं। लेकिन इन केबिनों की आड़ में गलत गतिविधियां बढ़ रही हैं। अभिभावक चिंतित हैं कि उनके बच्चे पढ़ाई के लिए आते हैं, लेकिन गलत रास्ते पर जा सकते हैं।
महिलाओं और परिवारों को भी इन इलाकों से गुजरते वक्त असहजता होती है। कुछ लोग कहते हैं कि इन कैफे के आसपास शराब पीने वालों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी रहता है, जिससे माहौल और खराब होता है।
कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिक, अभिभावक और सामाजिक संगठन अब पुलिस और जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इन कैफे और होटलों की गहन जांच होनी चाहिए। अगर अनैतिक गतिविधियां पाई जाती हैं, तो संचालकों पर सख्त एक्शन लिया जाए। साथ ही, पुलिस की कार्यशैली पर भी नजर रखने की जरूरत है, ताकि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे।
निष्कर्ष
रीवा के सिविल लाइन क्षेत्र में चल रहा यह ‘कपल केबिन’ का खेल अब खुलकर सामने आ चुका है। अगर समय रहते इस पर काबू नहीं किया गया, तो यह युवाओं के भविष्य और शहर की छवि के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।










