बोकारो थर्मल : बोकारो थर्मल क्षेत्र में CCL के बंद पड़े कारो स्पेशल फेज-2 प्रोजेक्ट में एक बार फिर अवैध गतिविधियों ने पैर पसार लिए हैं। खनन बंद होने के बावजूद यहां कोयले का काला कारोबार खुलेआम चल रहा है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि प्रशासनिक सख्ती के दावों के बावजूद जमीन पर हालात बिल्कुल उलट हैं।
आधा दर्जन से ज्यादा जगहों पर अवैध खनन

इस बंद परियोजना के भीतर करीब छह से अधिक स्थानों पर अवैध माइंस संचालित की जा रही हैं। खदानों को अस्थायी तरीके से खोदकर वहां से कोयला निकाला जा रहा है। इन जगहों पर न तो कोई सुरक्षा मानक अपनाया जा रहा है और न ही किसी प्रकार की निगरानी नजर आती है।
जान जोखिम में डालकर खदानों में उतर रहे लोग
अवैध खनन में शामिल लोग बिना किसी सुरक्षा उपकरण के गहराई तक खदानों में प्रवेश कर रहे हैं। बाइक के जरिए खदान के भीतर तक जाकर कोयले को बोरियों में भरकर बाहर निकाला जा रहा है। यह पूरा काम बेहद खतरनाक हालात में किया जा रहा है, जहां किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है।
धंसान का खतरा, कभी भी हो सकती है बड़ी दुर्घटना

विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरीके से बिना तकनीकी जांच और सुरक्षा के खनन किया जा रहा है, उससे खदानों के धंसने का खतरा लगातार बना हुआ है। अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो किसी बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।
छापेमारी में मिला था भारी मात्रा में कोयला
7 मार्च को सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए यहां छापेमारी की थी। इस दौरान करीब एक हजार बोरा कोयला जब्त किया गया था। कार्रवाई में CISF, CCL सुरक्षा कर्मियों और स्थानीय पुलिस की टीम शामिल थी। हालांकि यह कार्रवाई अस्थायी साबित होती दिख रही है।
वादे अधूरे, फिर सक्रिय हो गईं माइंस
छापेमारी के बाद अधिकारियों ने अवैध माइंस को जेसीबी से भरवाने का आश्वासन दिया था। लेकिन हकीकत यह है कि माइंस को उसी स्थिति में छोड़ दिया गया, जिससे अवैध खनन फिर से शुरू हो गया। इससे प्रशासनिक दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी नजर
स्थानीय लोगों की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। सवाल यह है कि क्या इस बार स्थायी समाधान निकलेगा या फिर यह अवैध खनन यूं ही चलता रहेगा। क्षेत्र में सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।










