संभल में भारतीय शिक्षा बोर्ड की संगोष्ठी, शिक्षा में संस्कारों पर जोर

संभल/बहजोई में कलेक्ट्रेट सभागार में भारतीय शिक्षा बोर्ड की संगोष्ठी हुई, डॉ. एन.पी. सिंह ने भारतीय मूल्यों आधारित शिक्षा पर जोर दिया, डीएम डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने संस्कारों में शिक्षकों की भूमिका अहम बताई, कार्यक्रम में शिक्षा के बदलते स्वरूप पर व्यापक चर्चा हुई

Sambhal News : उत्तर प्रदेश के संभल/बहजोई में आज बड़ा कार्यक्रम रखा गया था। दरअसल, कलेक्ट्रेट सभागार में भारतीय शिक्षा बोर्ड की जिला स्तरीय संगोष्ठी आयोजित की गई। सबसे पहले दोपहर करीब 1 बजे कार्यक्रम की शिरूआत हुआ, जिसमें शिक्षा और संस्कार आधारित व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन एवं पूर्व आईएएस डॉ. एन. पी. सिंह मौजूद रहे। वहीं, मुख्य अतिथि के तौर पर जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया शामिल हुए।

इसके अलाला, कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी गोरखनाथ भट्ट, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलका शर्मा और जिला विद्यालय निरीक्षक सर्वेश कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

दीप प्रज्वलित कर हुई शुरूआत

कार्यक्रम का शुभारंभ सभी अतिथियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्वलित कर किया गया। इससे सभी में अगल ही उत्साह देखने को मिला। इसके बाद संगोष्ठी में शिक्षा के बदलते स्वरूप और भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर विचार-विमर्श हुआ।

सामाजिक जिम्मेदारियों की भावना विकसित होना जरूरी

मुख्य वक्ता डॉ. एन. पी. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक पाश्चात्य शिक्षा के प्रभाव के कारण शिक्षा व्यवस्था में भारतीय संस्कृति और संस्कारों का अभाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल आर्थिक सफलता तक सीमित होता जा रहा है। विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों की भावना भी विकसित होना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड का उद्देश्य छात्रों को भारतीय संस्कृति, वेद, शास्त्र, उपनिषद और गीता जैसे आध्यात्मिक ज्ञान के साथ आधुनिक शिक्षा, कंप्यूटर विज्ञान और तकनीकी ज्ञान प्रदान करना है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को संस्कारवान, चरित्रवान और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण

मुख्य अतिथि जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों को संस्कार देने में माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि केवल आधुनिक सुविधाओं वाले बड़े विद्यालय ही शिक्षा की गुणवत्ता का पैमाना नहीं हो सकते। शिक्षा व्यवस्था में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के मूल्यों को भी महत्व देना जरूरी है।

ये लोग रहे मौजूद

संगोष्ठी के बाद डीआर रिसोर्ट में निजी और सरकारी विद्यालयों के प्रबंधकों एवं प्रधानाचार्यों के साथ शैक्षणिक संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सुनील शास्त्री, राज्य प्रभारी भारत स्वाभिमान ने किया। इस खास मौके पर खंड शिक्षाधिकारी एम. एल. पटेल, पतंजलि योग समिति के राज्य प्रभारी विपिन बिहारी, पतंजलि किसान सेवा समिति के राज्य प्रभारी दयाशंकर आर्य सहित कई सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, उद्योगपति और विभिन्न विद्यालयों के प्रबंधक व प्रधानाचार्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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