NEP : बोकारो के डीएवी पब्लिक स्कूल कथारा में त्रि-दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू। नई शिक्षा नीति के तहत अभिभावकों को शिक्षित करने पर विशेष जोर, 21वीं सदी की चुनौतियों पर चर्चा।
कार्यशाला का शुभारंभ
बोकारो थर्मल स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल, सीसीएल कथारा में शुक्रवार को त्रि-दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आगाज हुआ। इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को बदलती शिक्षा पद्धति के अनुरूप तैयार करना है। कार्यक्रम में झारखंड जोन-1 के कथारा, स्वांग, ललपनिया और दुग्धा स्कूलों के शिक्षक शामिल हुए, जिससे यह आयोजन क्षेत्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बन गया।

अतिथियों की मौजूदगी में हुआ उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन कथारा कोलियरी के वरीय खनन प्रबंधक कृष्ण मुरारी और कथारा ओपी प्रभारी राजेश प्रजापति की उपस्थिति में हुआ। पारंपरिक तरीके से तिलक और पुष्पगुच्छ के साथ अतिथियों का स्वागत किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्वलन ने कार्यक्रम को गरिमामय शुरुआत दी।
नई शिक्षा नीति में अभिभावकों की भूमिका पर जोर
विद्यालय के प्राचार्य सह सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी डॉ. जी.एन. खान ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि नई शिक्षा नीति केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं है।
उन्होंने कहा कि:
- अभिभावकों को शिक्षित और जागरूक करना भी उतना ही जरूरी है
- बच्चों के समग्र विकास में परिवार की भूमिका अहम होती है
- स्कूल और घर के बीच समन्वय शिक्षा को प्रभावी बनाता है
शिक्षकों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण की जानकारी
डॉ. खान ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत हर शिक्षक के लिए सालाना 50 घंटे का प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है।
- 25 घंटे प्रशिक्षण संस्था द्वारा
- 25 घंटे प्रशिक्षण सीबीएसई के माध्यम से
उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं शिक्षकों की दक्षता बढ़ाने और नई तकनीकों से जोड़ने में मददगार साबित होती हैं।
डिजिटल लर्निंग और बाल विकास पर फोकस
कार्यशाला में खासतौर पर बाल वाटिका के शिक्षकों को तकनीकी माध्यमों से प्रशिक्षित किया जा रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए प्रशिक्षण देकर उन्हें बच्चों के प्रारंभिक विकास में अधिक सक्षम बनाया जा रहा है। साथ ही 21वीं सदी की शैक्षिक चुनौतियों—जैसे तकनीक, नवाचार और स्किल आधारित शिक्षा—पर भी चर्चा की जा रही है।
गुरु का अहम योगदान
मुख्य अतिथि कृष्ण मुरारी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जीवन में सफलता के पीछे गुरु का अहम योगदान होता है। उन्होंने यह भी बताया कि कोल इंडिया में भी समय-समय पर इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे कार्यक्षमता में सुधार होता है।
प्राचार्यों और शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान
कार्यक्रम के अंत में डीएवी स्वांग की प्राचार्या डोलन चंपा बनर्जी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। आयोजन को सफल बनाने में विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्यों और शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मंच संचालन और व्यवस्थापन में भी टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई।










