झारखंड के रामगढ़ जिले में साइबर अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस मामले ने पूरे सिस्टम को हिला दिया है क्योंकि इसमें ठगों ने बैंक खातों का गलत इस्तेमाल करके देशभर में लोगों को निशाना बनाया। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क से जुड़ी 274 से ज्यादा शिकायतें देश के अलग-अलग राज्यों से दर्ज हैं।
कैसे चलता था ठगी का खेल?
यह गिरोह बहुत ही शातिर तरीके से काम करता था। आरोपी लोगों के बैंक खाते किराए पर लेते थे और फिर उन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी के पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। खाताधारकों को इसके बदले में मोटी रकम दी जाती थी, ताकि वे आसानी से अपने बैंक अकाउंट इस्तेमाल करने दें। बाद में यही खाते ठगी के पैसे को इधर-उधर भेजने में इस्तेमाल किए जाते थे।

मुख्य आरोपी और गिरोह का खुलासा
पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं—
- राहुल गुप्ता (गोला निवासी)
- रवि कुमार वर्मा (परसोतिया, रामगढ़ निवासी)
- रितेश अग्रवाल
- सोनू झा
इन सभी पर आरोप है कि ये लोग मिलकर बैंक खातों की खरीद-फरोख्त और साइबर ठगी के नेटवर्क को चला रहे थे।
कितने बड़े स्तर पर फैला था नेटवर्क
पुलिस जांच में यह साफ हुआ है कि यह कोई छोटा मामला नहीं था, बल्कि एक बड़ा संगठित साइबर अपराध नेटवर्क था। इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों के जरिए देश के कई राज्यों में धोखाधड़ी की गई। अब तक 274 शिकायतें अलग-अलग जगहों से दर्ज हो चुकी हैं, जो इस बात का सबूत है कि ठगी का दायरा बहुत बड़ा था।
पुलिस को कैसे मिली जानकारी?
यह पूरा मामला तब सामने आया जब भारतीय स्टेट बैंक के एक खाते में संदिग्ध लेनदेन की सूचना मिली।
खाता संख्या 444616958956, जो “गणेश इंटरप्राइजेज” के नाम से पंजीकृत था, उसमें असामान्य ट्रांजैक्शन हो रहे थे। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
यह जानकारी गृह मंत्रालय की 14C परियोजना के तहत चल रहे समन्वय पोर्टल और प्रतिबिंब पोर्टल से मिली थी, जिसके बाद मामला तेजी से खुलने लगा।
खाते का गलत इस्तेमाल कैसे हुआ?
जांच में सामने आया कि यह बैंक खाता एमएसएमई योजना के तहत खोला गया था। खाते के प्रोपराइटर के रूप में राहुल गुप्ता, रवि कुमार वर्मा और अजय शर्मा (छोटकाकना, रामगढ़ निवासी) जुड़े हुए थे। इन लोगों ने इस खाते का इस्तेमाल अवैध पैसे के लेन-देन के लिए किया और इसे साइबर ठगों को उपलब्ध कराया।
किराए के खाते का खेल
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लोग अपने ही बैंक खाते को पैसे लेकर दूसरों को किराए पर दे देते थे। एक मामले में सामने आया कि तीन लोगों ने अपना करंट अकाउंट बनाया और उसे आगे बेच दिया। इसके बदले उन्हें करीब 40-40 हजार रुपये दिए गए थे। यही खाते बाद में साइबर ठगी के पैसे ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए गए।
पुलिस की कार्रवाई
रामगढ़ पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने इस पूरे नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की है।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से—
- 6 मोबाइल फोन
- 11 सिम कार्ड
बरामद किए हैं।
पुलिस का कहना है कि इन डिवाइसों से कई अहम जानकारी मिली है, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुल रही हैं।
SDPO चंदन वत्स का बयान
इस मामले को लेकर रामगढ़ के SDPO Chandan Vats ने बताया कि यह एक संगठित साइबर अपराध का मामला है। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति सोनू झा कई लोगों के बैंक खाते लेकर उन्हें आगे बेचता था। उन्होंने यह भी बताया कि तीन लोगों ने मिलकर करंट अकाउंट खुलवाया था और उसे भी बेच दिया गया था।
कैसे बढ़ा साइबर अपराध का खतरा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के मामलों में सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग जल्दी पैसे के लालच में अपने बैंक अकाउंट दूसरों को दे देते हैं। लेकिन बाद में वही खाते बड़े साइबर अपराध में इस्तेमाल होते हैं, जिससे असली खाताधारक भी कानूनी परेशानी में फंस जाते हैं।
जांच अभी जारी
पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और पैसे कहां-कहां भेजे गए।साथ ही, देशभर में दर्ज 274 शिकायतों को जोड़कर पूरे गिरोह का नक्शा तैयार किया जा रहा है।
निष्कर्ष
रामगढ़ का यह मामला दिखाता है कि साइबर ठगी अब कितनी संगठित और खतरनाक हो चुकी है। सिर्फ एक बैंक खाते के गलत इस्तेमाल से देशभर में सैकड़ों लोग शिकार बन गए। पुलिस की यह कार्रवाई एक बड़ा कदम है, लेकिन यह भी साफ है कि ऐसे अपराधों से बचने के लिए लोगों को भी जागरूक होना बहुत जरूरी है।










