S Jaishankar Foreign Visit: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर रविवार से छह देशों की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा पर रवाना हो गए हैं। इस दौरान वे पश्चिम एशिया के चार देशों के अलावा अमेरिका और बेल्जियम की यात्रा करेंगे. इस दौरे में ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, प्रौद्योगिकी और वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह यात्रा पश्चिम एशिया के प्रमुख साझेदार देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
सबसे पहले चार खाड़ी देशों का दौरा
यात्रा की शुरुआत कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान से होगी। इन देशों के शीर्ष नेतृत्व और विदेश मंत्रियों के साथ अलग-अलग दौर की बैठकों का कार्यक्रम तय है। बातचीत का केंद्र द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने, निवेश के नए अवसर तलाशने, ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे रहेंगे।

खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए केवल तेल और गैस का प्रमुख स्रोत ही नहीं, बल्कि लाखों भारतीयों का कार्यस्थल भी है। ऐसे में इन देशों के साथ मजबूत संबंध भारत की आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
ऊर्जा सुरक्षा पर रहेगा फोकस
पश्चिम एशिया में हाल के महीनों में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित और निर्बाध बनाए रखने की दिशा में सक्रिय नजर आ रहा है।
विदेश मंत्री की बैठकों में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की दीर्घकालिक उपलब्धता, ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने और आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर रखने जैसे विषयों पर विशेष चर्चा होने की संभावना है।
संयुक्त राष्ट्र में शुरू करेंगे भारत का अभियान
खाड़ी देशों के बाद विदेश मंत्री अमेरिका पहुंचेंगे। न्यूयॉर्क में 13 जुलाई को भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 2028-29 अवधि की अस्थायी सदस्यता के लिए अपने आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेगा।
इस अभियान के जरिए भारत विभिन्न देशों का समर्थन जुटाने के साथ-साथ वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक सक्रियता को और मजबूत करने का प्रयास करेगा। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने की वकालत करता रहा है।
ब्रुसेल्स में भारत और यूरोपीय संघ के बीच होगी अहम बैठक
अमेरिका यात्रा के बाद एस. जयशंकर बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स जाएंगे। यहां 14 और 15 जुलाई को भारत-यूरोपीय संघ ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) की तीसरी मंत्रीस्तरीय बैठक आयोजित होगी।
इस दौरान व्यापार, डिजिटल तकनीक, निवेश, सप्लाई चेन, उभरती तकनीकों और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग इस बैठक का प्रमुख केंद्र रहेगा।
कैरिबियाई दौरे में हुए आठ अहम समझौते
इस बहु-देशीय यात्रा से पहले विदेश मंत्री त्रिनिदाद और टोबैगो का दौरा कर चुके हैं। वहां दोनों देशों के बीच पर्यटन, स्वास्थ्य, सौर ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और आयुर्वेद सहित कई क्षेत्रों में आठ समझौता ज्ञापनों पर सहमति बनी।
इन समझौतों में सौर ऊर्जा परियोजनाएं, सार्वजनिक स्वास्थ्य, ऐतिहासिक स्थलों का विकास और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग जैसी योजनाएं भी शामिल हैं, जो दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही हैं।
द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देने की तैयारी
त्रिनिदाद और टोबैगो में विदेश मंत्री ने वहां की प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकों में सुरक्षा, स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण, फोरेंसिक विज्ञान और बुनियादी ढांचे से जुड़े सहयोग की समीक्षा की। साथ ही भारत द्वारा पहले घोषित विकास परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि छह देशों का यह पूरा दौरा भारत की ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ विदेश नीति को और मजबूत करेगा। ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक संस्थाओं में प्रभाव बढ़ाने और आर्थिक साझेदारी को विस्तार देने की दिशा में यह यात्रा आने वाले समय में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।










