शंकराचार्य की धर्मयुद्ध यात्रा को मिला जनसमर्थन, गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की उठी मांग

'राष्ट्रमाता' का दर्जा दिलाने की मांग के साथ जिले में पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, जगह-जगह हुआ स्वागत

फर्रुखाबाद: ज्योतिषपीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की बहुचर्चित ‘गौ-रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा’ गुरुवार को फर्रुखाबाद जनपद में पहुंच गई। यात्रा के जिले में प्रवेश करते ही विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं एवं गौभक्तों ने उनका भव्य स्वागत किया। यात्रा को लेकर जिले में धार्मिक और सामाजिक संगठनों के बीच विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती देशभर में गौ संरक्षण और गोवंश के सम्मान को लेकर जनजागरण अभियान चला रहे हैं। इसी क्रम में निकाली जा रही यह धर्मयुद्ध यात्रा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से होकर गुजर रही है। फर्रुखाबाद में यात्रा का कार्यक्रम अमृतपुर, कायमगंज, भोजपुर तथा सदर विधानसभा क्षेत्रों में निर्धारित किया गया है, जहां विभिन्न सभाओं और जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से गौ संरक्षण का संदेश दिया जाएगा।

यात्रा का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकारों का ध्यान गौ संरक्षण के मुद्दे की ओर आकर्षित करना है। शंकराचार्य की प्रमुख मांग है कि गाय को देश में ‘राष्ट्रमाता’ तथा उत्तर प्रदेश में ‘राज्यमाता’ का दर्जा दिया जाए। इसके साथ ही पूरे देश में गोवध पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करने और गौशालाओं की स्थिति में सुधार करने की भी मांग की जा रही है।

शंकराचार्य ने कई अवसरों पर कहा है कि भारतीय संस्कृति, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गाय का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। ऐसे में गौवंश की रक्षा केवल धार्मिक विषय नहीं बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य को लेकर वे जनसमर्थन जुटाने के लिए देशव्यापी यात्रा कर रहे हैं।

फर्रुखाबाद पहुंचने से पूर्व कन्नौज में यात्रा उस समय चर्चा का विषय बन गई थी, जब रात्रि विश्राम के लिए उपयुक्त व्यवस्था न मिलने पर शंकराचार्य अपने अनुयायियों के साथ धरने पर बैठ गए थे। इस दौरान उन्होंने स्थानीय प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया था। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य हुई थी।

इधर हाल ही में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को उस समय बड़ी कानूनी राहत मिली, जब सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एक पॉक्सो (POCSO) मामले में उनकी अग्रिम जमानत को बरकरार रखा। अदालत के इस फैसले के बाद उनके समर्थकों ने इसे न्याय की जीत बताते हुए स्वागत किया।

फर्रुखाबाद में यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में साधु-संतों, सामाजिक संगठनों और गौभक्तों के शामिल होने की संभावना है। प्रशासन भी यात्रा को देखते हुए सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर सतर्क नजर आ रहा है। जिले में कई स्थानों पर स्वागत कार्यक्रम, धार्मिक सभाएं और जनसंवाद आयोजित किए जाने की तैयारी की गई है।

गौ-रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा के माध्यम से शंकराचार्य एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर गौ संरक्षण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने का प्रयास कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि उनकी मांगों को लेकर सरकार और समाज किस प्रकार की प्रतिक्रिया देता है।

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