फर्रुखाबाद: ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज की अगुवाई में निकाली जा रही ‘गौ-रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा’ गुरुवार को फर्रुखाबाद पहुंची, जहां सनातन धर्मावलंबियों, साधु-संतों और स्थानीय नागरिकों ने यात्रा का जगह-जगह भव्य स्वागत किया। पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही और पुष्पवर्षा, माल्यार्पण तथा आरती के माध्यम से शंकराचार्य का अभिनंदन किया गया।
फर्रुखाबाद के लाल गेट फब्बारा पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि देश में गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और संस्कृति का आधार है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से गाय को अविलंब ‘राष्ट्र माता’ तथा ‘राज्य माता’ का दर्जा दिए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि गौवंश की रक्षा और सम्मान के लिए समाज को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी।

उन्होंने जनता से आह्वान करते हुए कहा कि आने वाले समय में ऐसे जनप्रतिनिधियों को ही वोट दिया जाए, जो गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए संसद और विधानसभाओं में प्रभावी ढंग से आवाज उठाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि गौ-संरक्षण केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा है।
गोरखपुर से दिल्ली तक जनजागरण का अभियान
शंकराचार्य ने बताया कि गौ-रक्षा और गौ-संवर्धन के प्रति जनजागरण फैलाने के उद्देश्य से यह धर्मयुद्ध यात्रा गोरखपुर से प्रारंभ हुई है। यात्रा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से होकर देश की राजधानी दिल्ली पहुंचेगी, जहां गौ-संरक्षण से संबंधित मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा।
जहानगंज से शहर तक स्वागत का सिलसिला
यात्रा के फर्रुखाबाद जनपद में प्रवेश करते ही जहानगंज में श्रद्धालुओं ने जोरदार स्वागत किया। इसके बाद फतेहगढ़ में एक मंदिर परिसर में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर शंकराचार्य का अभिनंदन किया गया। फतेहगढ़ के मुख्य बाजार से होते हुए यात्रा जब फर्रुखाबाद नगर पहुंची तो गुड़गांव देवी मंदिर के निकट श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
लाल गेट फब्बारा, मुख्य बाजार और चौक क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में लोगों ने यात्रा का स्वागत किया। चौक पर श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य की आरती उतारकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। यात्रा मार्ग में बागर और छोटी जेल के समीप भी स्वागत द्वार बनाए गए थे, जहां विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने माल्यार्पण कर अभिनंदन किया।
पांडेश्वर नाथ मंदिर में की पूजा-अर्चना
धर्मयुद्ध यात्रा का समापन ऐतिहासिक पांडेश्वर नाथ मंदिर में हुआ। मंदिर पहुंचने पर पुजारियों एवं भक्तों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शंकराचार्य की भव्य आरती उतारी। इसके बाद उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में भगवान के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
मंदिर परिसर में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने पांडेश्वर नाथ मंदिर के पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे प्राचीन धार्मिक स्थल भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं, जिनके संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी समाज की है।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से धर्म, संस्कृति और गौ-सेवा के प्रति समर्पित रहने का आह्वान करते हुए कहा कि गौ-रक्षा का संकल्प केवल शब्दों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत, सामाजिक कार्यकर्ता, विभिन्न धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी और श्रद्धालु मौजूद रहे। यात्रा के पूरे मार्ग में श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक आस्था का वातावरण देखने को मिला।










